राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर योगी बोले- कार्रवाई पर संदेह नहीं होना चाहिए

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शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस अयोध्या में चढ़ावे की चर्चा वे करते हैं, मुद्दा क्या था? राम जन्मभूमि में चढ़ावा चोरी से संबंधित एक प्रकरण सामने आया, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने इसके लिए सिफारिश की, SIT बनी, SIT के अनुसार कार्रवाई हुई, कार्रवाई चल भी रही है। उसका नाम चंदा चोरी के साथ जोड़ा गया।मामला कहां से कहां पहुंच रहा है, वो जो अपराधी था उसके खिलाफ कार्रवाई हुई है, दूध का दूध पानी का पानी ये पहले दिन से कह रखा है और उसके अनुरूप इस पर कार्रवाई करने के लिए सरकार भी और तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भी पूरी तरह कृत संकल्पित है, इसमें कोई संदेह किसी को होना भी नहीं चाहिए।

दरअसल शुक्रवार को अयोध्या में पूज्य संत ब्रह्मलीन महंत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज के पुण्य स्मृति में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए। इस दौरान अपने संबोधन में योगी ने इतिहास का भी जिक्र किया।

योगी ने कहा इतिहास एक प्रेरणा भी होती है, एक सबक भी होता है। इतिहास के अतीत के गौरवशाली क्षणों पर गौरव की अनुभूति होती है, गर्व की अनुभूति होती है।वह हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, लेकिन अतीत की गलतियां हमारे सामने इतिहास के रूप में परिमार्जन का एक माध्यम भी हम सबके लिए होता है। जब भी हम उसकी अनदेखी करते हैं, इसका मतलब हम अतीत की उन गलतियों को दोहराने का फिर से प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने खुद कहा कि 1526 में आज से 500 वर्ष पहले आज का जो संभल है, इस संभल में श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर के वहां पर एक गुलामी का ढांचा खड़ा कर दिया गया।1528 में अगर उसकी प्रतिकार 1526 में एकजुट होकर के संभल में हुई होती, तो कदाचित 1528 अयोध्या में दोहराने का दुस्साहस कोई नहीं करता।
यानी मात्र दो वर्ष के बाद अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर प्रभु श्री राम के मंदिर को क्षतिग्रस्त करके सनातन धर्मावलंबियों को अपमानित करते हुए एक गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया, और सनातन धर्मावलंबी भी कभी मौन नहीं रहा, चुप नहीं रहा।विभाजित था, बटा हुआ था, गुलामी के पूर्व ऐसा नहीं कि उसके पास बल, बुद्धि या वैभव की कमी रही हो, वह सब कुछ था, कमी थी तो एकता की कमी थी।

फिर योगी ने कहा कि एक दिशा में, एक स्वर में, एक साथ चलने की कमी थी, हम बंटे थे और इसीलिए कटे थे बार-बार यही प्रश्न खड़ा होता है, आज 14 अगस्त है।14 अगस्त 1947 को आजादी के एक दिन पहले तब केवल हिंदू और सिख ही नहीं कटा था, तब भारत भी कटा था। आज से ठीक 77 वर्ष पहले सनातन राष्ट्र के रूप में जो भारत आदिकाल से एक इकाई के रूप में रहा हो, वह भारत कटा तो हिंदू भी कटा, कोई प्रश्न नहीं पूछता, आज भी जब पाकिस्तान और बांग्लादेश के अंदर निर्दोष हिंदू मारे जाते हैं, काटे जाते हैं और यह हर व्यक्ति जानता है कि यह मरने वाला जो हिंदू है, यह सभी दलित समुदाय से है।

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन पूज्य संतों ने जो संघर्ष किया, सम-विषम परिस्थितियों में जिन चुनौतियों से जूझे थे, वह अकल्पनीय थी।कोई उसकी कल्पना नहीं कर सकता था, किस प्रकार की विषम परिस्थितियां थीं।उन स्थितियों में वो संघर्ष हुआ था।

लेकिन ये हम सब हिंदुओं की त्रासदी है कि जब अयोध्या में प्रभु का राजतिलक होना है, तब उन्हें वनवास दे दिया जाता है, क्योंकि कोई न कोई मंथरा आकर के फिर कुछ न कुछ गुल खिलाने का काम करने लगती है, और यही कुछ अयोध्या के साथ फिर से हो रहा है। अयोध्या धाम पर निशाना साध करके इसी बहाने केवल अयोध्या को नहीं, केवल राम जन्मभूमि को नहीं, सनातन धर्म फिर से एक बार विधर्मियों की निशाने पर है और चेहरे वही हैं जिन्होंने कभी 1947 में मौन साध लिया था।

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