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रूस-यूक्रेन युद्ध :यूक्रेन ने अजीत डोभाल को फोन कर शांति प्रस्ताव पर समर्थन मांगा

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न्यूज डेस्क
रूस यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए एक साल खत्म होने में सिर्फ एक दिन बचा है। बुधवार को रूस ने दोनेस्क के बखमुत और अन्य क्षेत्रों में भीषण गोलाबारी बढ़ा दी है। इस बीच, यूक्रेन ने शांति पर संयुक्त राष्ट्र में मसोदा प्रस्ताव के लिए भारत का समर्थन मांगा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख एंद्री यरमक ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से फोन पर बात कर नई दिल्ली के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। बता दें कि एक दिन पहले ही फ्रांस की और से भी इस मुद्दे पर भारत को समर्थन के लिए मनाने की पहल हुई थी।

यूक्रेन की तरफ से यह वार्ता ऐसे वक्त में हुई है, जब युद्ध को एक वर्ष खत्म होने जा रहा है। यरमक ने डोभाल को मौजूदा हालात के बारे में वार्ता की और बखमुत में भीषण संग्राम की पूरी जानकारी दी। यरमक ने कहा कि हम जानते हैं कि रूस कुछ आक्रामक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है और हम जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। रूसी सेना बहुत ही प्रेरणाहीन है,जबकि यूक्रेनी योद्धा असाधारण बहादुरी दिखा रहे हैं। यूक्रेनी अधिकारी ने कहा कि हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम अपने सभी क्षेत्रों को मुकत नहीं कर लेते। हमें केवल हथियारों की जरूरत है।

उल्लेखनीय है कि यूएन चार्टर सिद्धांतों के समर्थन पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मसौदा प्रस्ताव 23 फरवरी को पेश होना है। समें यूक्रेन में स्थायी शांति की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। अभी तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद,संयुक्त राष्ट्र महासभा और मानवाधिकार परिषद में रूस के खिलाफ पेश हुए प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान भारत ज्यादातकर अनुपस्थित रहा है।

युद्ध की स्थायी समाप्ति का दस्तावेज

यूक्रेनी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख एंद्री यरमक ने एनएसए अजीत डोभाल से कहा कि हमारी सेना युद्ध के मैदान में लड़ना जारी रखेगी,लेकिन साथ ही यह शांति योजना का प्रस्ताव दिया है। इस दस सूत्रीय शांति सूत्र में युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए योजना रखी गयी है। इस इस मुद्दे पर भारत की तरफ से सहयोग और समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।

गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश होने वाला यह दस्तावेज संप्रभुता, स्वतंत्रता और जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। यरमक ने कहा कि हमारे लक्ष्य पारदर्शी और स्पष्ट हैं, हम रूस की एक इंच जमीन का दावा नहीं कर करते हैं। हम बस अपना क्षेत्र वापस लेना चाहते हैं। यरमक ने कहा कि यह सिद्धांत भारत और दुनिया के दूसरे देश के सााथ साझा किये गए हैं।

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