क्या आप सोच सकते हैं कि बिना सीमेंट या मसाले के पूरा घर तैयार हो सकता है? दरअसल तकनीक इस कदर आगे बढ़ चुकी है कि ऐसी ईटें तैयार कर ली गई हैं, जो सिर्फ पानी की मदद से एक साथ जुड़ी रह सकती हैं। इन्हें वाटर-एक्टिवेटिंग इंटरलॉकिंग ब्रिक्स कहा जाता है। इस एडवांस कंस्ट्रकशन टेक्नोलॉजी की खासियत है कि ये घर बनाते समय इस्तेमाल होने वाली रेत, सीमेंट और गीले मसाले की जरूरत को पूरी तरह खत्म कर देती है। गौरतलब है कि घर बनाते समय इस सामान पर कुल लागत का अच्छा-खासा बड़ा हिस्सा लगता है। रेत सीमेंट आदि पर खर्च होता है।
स्मार्ट ईंट से घर बनाने की लागत काफी कम हो सकती है क्योंकि एक वाटर-एक्टिवेटिंग इंटरलॉकिंग ईंट को बनाने का खर्च सिर्फ 8-12 रुपये पड़ता है। इतना ही नहीं, इन ईंटों की मदद से घर अभी भी बनाए जा रहे हैं और इनके काम करने का तरीका बेहतरीन है।
यह ईंटें मैकेनिकल इंटरलॉकिंग और वाटर-एक्टिवेटेड केमिकल बाइंडिंग तकनीक पर काम करती हैं। इन खास ईंटों का डिजाइन आम ईंटों से पूरी तरह से अलग होता है। इन्हें मेल-फीमेल पैटर्न में ढाला जाता है, जिससे ये एक-दूसरे के साथ फिट हो जाती हैं। इससे इमारत को मजबूती और ईंटों को आपस में जुड़े रहने की ग्रिप मिलती है।
इन ईटों को कुछ खास ड्राई-केमिकल बाइंडर्स जैसे कि रिएक्टिव पॉलिमर या मोडिफाइड हाइड्रोलिक मटीरियल्स को मिलाकर तैयार किया जाता है। ऐसे में यह डिजाइन और मटीरियल के मामले में किसी भी आम ईंट से पूरी तरह अलग होती हैं।
निम्नलिखित कारणों से बिना सीमेंट मसाले के भी चिपकी रहती हैं ये ईंटे:
जैसा कि पहले बताया गया किये ईंटे खास मेल-फीमेल डिजाइन के हिसाब से तैयार की जाती हैं और शुरुआत में इन्हें बिना किसी सीमेंट या गीले मसाले के एक-दूसरे के ऊपर खाचों में फिट करके सेट किया जाता है।
जैसे ही दीवार की एक तय ऊंचाई पूरी होती है इसे पानी छिड़क कर गीला किया जाता है।
पानी के संपर्क में आते ही ईंटों में मौजूद बाइंडिंग कैमिकल्स में हाइड्रेशन का प्रोसेस शुरू हो जाता है। इस रिएक्शन की वजह से ईंटें आपस में मॉलिक्यूलर लेवल पर जुड़ जाती हैं।
आसान भाषा में समझाएं, तो ईंटो में ऐसे पदार्थ या कैमिकल्स होते हैं, जो गीले होने पर रिएक्ट करते हैं और ईंटें आपस में इस तरह से जुड़ जाती हैं कि वे अलग-अलग ईंटें नहीं बल्कि एक ही ठोस पत्थर की दीवार हों।
स्मार्ट ईंट साधारण ईंटों से निम्न मायनों में बेहतर होती है:
अगर दीवारों को साधारण ईंटों से बनाया जाए, तो उन्हें आपस में ठोस होने के लिए कई दिनों तक तराई की जरूरत पड़ती है। वहीं वाटर-एक्टिवेटेड ईंटों पर पानी पड़ते ही वे बेहद ठोस और सबसे ज्यादा मजबूती हासिल कर लेती हैं।
आम ईंटे सीमेंट और गीले मसाले की वजह से एक दूसरे के साथ जुड़ती हैं वहीं वाटर-एक्टिवेटिंग इंटरलॉकिंग ईंटें अपने खास डिजाइन की वजह से एक दूसरे के साथ फिट हो जाती हैं। इसका दूसरा बड़ा फायदा यह है कि इससे दीवारों में नमी और क्रैक्स आने की संभावना नहीं रहती।
आम ईंटों के मुकाबले इंटरलॉकिंग डिजाइन की वजह से ये ईंटें भूकंप के झटकों को बेहतर तरीके से सहन कर पाता है। इससे दीवार के ढहने की संभावना काफी कम रह जाती है।

