पटना: बिहार के जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से बड़े या निजी अस्पतालों का रुख करने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई अहम निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि की अध्यक्षता में बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में जिला अस्पतालों की कार्यप्रणाली, रेफरल व्यवस्था, डॉक्टरों की उपलब्धता, आपातकालीन सेवाओं, सर्जरी और आयुष्मान भारत योजना के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में सभी जिलों के सिविल सर्जन, अस्पताल अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में साफ किया गया कि सरकारी अस्पतालों को इस तरह मजबूत किया जाए कि मरीजों को प्राथमिक उपचार से लेकर आवश्यक सर्जरी तक की सुविधा अधिक से अधिक अपने जिले में ही मिल सके।
बिना ऑनलाइन एंट्री और बेसिक जांच के नहीं होगा रेफरल
स्वास्थ्य विभाग ने रेफरल व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब किसी मरीज को रेफर करने से पहले उसका रेफरल Bhavya Portal पर ऑनलाइन दर्ज करना और जरूरी Basic Diagnostics कराना अनिवार्य होगा।
PHC और CHC से मरीजों को सीधे बड़े अस्पतालों में भेजने की प्रवृत्ति को कम करने पर जोर दिया गया है। विभाग का उद्देश्य है कि जिस स्तर पर मरीज का उपचार संभव है, उसे वहीं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफर किया जाए।
जिला अस्पतालों में 24 घंटे Emergency और Triage व्यवस्था
सभी जिला अस्पतालों में 24×7 Emergency Services को मजबूत करने के साथ-साथ Triage System लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की गंभीरता के आधार पर उनकी प्राथमिकता तय कर तुरंत उपचार उपलब्ध कराना है। यानी गंभीर मरीजों को सामान्य मरीजों की कतार में लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
ICU से लेकर 70 तरह की सर्जरी तक पर फोकस
बैठक में जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर युक्त ICU को तत्काल सक्रिय करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही प्रत्येक जिला अस्पताल को 70 प्रकार की सर्जरी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है।
इसके लिए Gynecology, General Surgery और Orthopedics के अलग-अलग और पूरी तरह कार्यशील ऑपरेशन थिएटर विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन अस्पतालों में जगह की समस्या है, वहां Pre-fab structures के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।
Ayushman Bharat Claims से मापा जाएगा अस्पताल का प्रदर्शन
सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। विभाग अब अस्पतालों के प्रदर्शन का आकलन Ayushman Bharat Claims के आधार पर भी करेगा।
स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश दिया कि पात्र मरीजों को सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं के बावजूद निजी अस्पतालों में भेजने के बजाय जिला अस्पतालों में ही आयुष्मान योजना के तहत इलाज उपलब्ध कराया जाए।
डॉक्टरों की ड्यूटी में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
ड्यूटी रोस्टर को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की निर्धारित ड्यूटी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अगर निरीक्षण के दौरान कोई चिकित्सक बिना अनुमति ड्यूटी से गायब मिलता है या सरकारी ड्यूटी के समय निजी क्लिनिक में काम करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
जुलाई में जिला अस्पतालों में हुईं 5,651 सर्जरी
सरकारी अस्पतालों में सर्जिकल सेवाओं को लेकर विभाग के आंकड़े भी सामने आए हैं। जुलाई 2026 में बिहार के जिला अस्पतालों में कुल 5,651 सर्जरी की गईं। इनमें अररिया 423 सर्जरी के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद नालंदा में 327, भोजपुर में 301, वैशाली में 292 और मधुबनी में 287 सर्जरी दर्ज की गईं। इन अस्पतालों में LSCS, BTL, MTP, Cataract Surgery, Hernia Repair, Hydrocele, Appendix और Orthopedic समेत कई जरूरी सर्जरी की गईं।
सासाराम में 24 घंटे में 20 और मुंगेर में 10 घंटे में 12 सर्जरी
सर्जिकल सेवाओं में सुधार की तस्वीर सदर अस्पताल सासाराम और सदर अस्पताल मुंगेर में भी दिखाई दी। 11 अगस्त को सासाराम सदर अस्पताल में 24 घंटे के भीतर 20 सर्जरी सफलतापूर्वक की गईं। वहीं, मुंगेर सदर अस्पताल में 10 घंटे के दौरान 12 सर्जरी की गईं। विभाग के अनुसार दोनों अस्पतालों की मेडिकल और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें मरीजों को समय पर उपचार देने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
सिर्फ सी-सेक्शन तक सीमित नहीं रहेंगी सदर अस्पतालों की सर्जरी
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत के तहत सदर अस्पतालों में सर्जिकल सेवाओं को सिर्फ Cesarean Delivery तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
Orthopedic Surgery, Hernia, Appendix, Fissure, Fistula और Cataract जैसी सर्जरी भी अधिक संख्या में करने के निर्देश दिए गए हैं। पात्र मरीजों के उपचार से जुड़े आयुष्मान Claims को समय पर दर्ज करने पर भी जोर दिया गया।
इससे सरकारी अस्पतालों में मौजूद डॉक्टरों, उपकरणों और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होने के साथ मरीजों को अपने ही जिले में इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।
स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को भरोसा दिया कि अस्पतालों के संचालन, ऑनलाइन सिस्टम, उपकरणों या अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए विभाग आवश्यक सहयोग करेगा। साथ ही सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षकों से अपनी समस्याएं विभाग के सामने रखने को कहा गया, ताकि उनका समयबद्ध समाधान किया जा सके।

