बिहार की चीनी मिलों को मिलेगी नई रफ्तार! भूमि विवादों पर सरकार सख्त, लंबित केस जल्द होंगे खत्म

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पटना: बिहार में चीनी उद्योग को गति देने के लिए राज्य सरकार ने चीनी मिलों से जुड़े भूमि विवादों और लंबित न्यायालयी मामलों के समाधान की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। सरकार का प्रयास है कि जमीन से जुड़े विवादों के कारण किसी चीनी मिल के संचालन, प्रबंधन या भविष्य के विस्तार में बाधा न आए।

इसी सिलसिले में बुधवार को राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान भी मौजूद रहे। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य की विभिन्न चीनी मिलों से संबंधित भूमि और कोर्ट केसों की मामलेवार समीक्षा की।

बारा चकिया चीनी मिल की 1,008 एकड़ जमीन पर चर्चा

बैठक में पूर्वी चंपारण की बारा चकिया चीनी मिल से जुड़ी भूमि और परिसंपत्तियों के मामले की विस्तार से समीक्षा की गई।

इस मामले में करीब 1,008 एकड़ भूमि शामिल है, जिसमें बेतिया राज की भूमि भी बताई गई है। अधिकारियों से जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित न्यायालयी मामलों की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली गई।

मोतिहारी की चीनी मिल की जमीन का भी Review

मोतिहारी स्थित मेसर्स हनुमान शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े भूमि मामले पर भी बैठक में चर्चा हुई।
इसमें 13 बीघा 6 कट्ठा 13 धूर फ्रीहोल्ड भूमि और बेतिया राज की 24 बीघा 15 कट्ठा 2 धूर लीजहोल्ड भूमि से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई।

अधिकारियों को उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों का न्यायालय में चल रहे मामलों से मिलान कर स्पष्ट स्थिति तैयार करने को कहा गया।

सासामुसा चीनी मिल का मामला भी समीक्षा के दायरे में

गोपालगंज की सासामुसा चीनी मिल से संबंधित भूमि मामलों की भी समीक्षा की गई। इसमें 44 बीघा 8 कट्ठा 7 धूर स्वामित्व वाली भूमि तथा 21 बीघा 19 कट्ठा 9 धूर हथुआ राज की मुकर्ररी लीज भूमि से जुड़े मामले शामिल रहे। सरकार की कोशिश है कि इन मामलों में उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी तथ्यों के आधार पर जल्द से जल्द आगे की कार्रवाई की जाए।

Government और Raiyati Land दोनों मामलों पर नजर

समीक्षा बैठक में राज्य की चीनी मिलों से जुड़े विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों को मामलेवार देखा गया। खास तौर पर उन मामलों पर ध्यान दिया गया जिनमें Government Land और Raiyati Land दोनों शामिल हैं। अधिकारियों से पूछा गया कि अब तक संबंधित मामलों में न्यायालय में क्या कार्रवाई हुई है, विभाग के पास कौन-कौन से राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और अदालत के समक्ष किन तथ्यों एवं दस्तावेजों को प्रस्तुत किया गया है।

अधिकारियों को मिले Fast-Track Action के निर्देश

राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चीनी मिलों से जुड़े लंबित मामलों में तथ्यों की गहराई से जांच कर तेजी से विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि विवादों के कारण चीनी मिलों के संचालन या उद्योग के विस्तार की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक मामले में जमीन की प्रकृति, स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालय में रखे गए तथ्यों का सही तरीके से मिलान करने पर जोर दिया गया।

सरकारी जमीन के मामलों में मजबूत पैरवी

सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में राज्य सरकार के हितों की मजबूती से पैरवी करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं रैयती जमीन से जुड़े मामलों में उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर स्पष्ट स्थिति तैयार करने को कहा गया है। अधिकारियों को लंबित मामलों की Updated Status Report तैयार करने और आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रभावी न्यायालयी पैरवी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

चीनी उद्योग के विस्तार में नहीं आएगी जमीन की बाधा

बिहार सरकार का फोकस राज्य में Sugar Industry को मजबूत करने, मौजूदा चीनी मिलों के सुचारू संचालन और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर है। इसी वजह से भूमि विवादों और न्यायालयी मामलों को भी उद्योग के विकास से जोड़कर प्राथमिकता के आधार पर देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि जहां जमीन से जुड़े मामलों के कारण चीनी मिलों के संचालन या विकास में रुकावट है, वहां कानून और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर समयबद्ध तरीके से समाधान निकाला जाए।

दोनों विभागों के बीच बेहतर Coordination पर जोर

बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा गन्ना उद्योग विभाग के बीच बेहतर Coordination के जरिए मामलों के जल्द समाधान पर जोर दिया गया। अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने को कहा गया है। इससे सरकार को उम्मीद है कि जमीन से जुड़े विवादों के कारण अटकी चीनी मिलों की गतिविधियों और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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