हैदराबाद की नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। साल 2026 बैच के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रों का आरोप है कि हाल ही में जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश का रवैया संवेदनहीन रहा है, जो कि एक कानून के छात्र के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
छात्रों का आरोप है कि हाल ही में कोर्ट में जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश का रवैया संवेदनहीन रहा है।कानून के छात्रों का मानना है कि CJI का यह आचरण उन संवैधानिक मूल्यों और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, जो उन्हें विश्वविद्यालय में सिखाए जाते हैं, इसलिए वे उनके हाथों अपनी डिग्री स्वीकार नहीं करना चाहते।
जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी।जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने पुलिस बर्बरता के वीडियो सबूत देखने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि “हमारे पास इसे देखने का समय नहीं है।” इसके अलावा, छात्रों का आरोप है कि CJI ने युवाओं के संदर्भ में ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टा) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और याचिकाकर्ता के वकील को अपनी बात पूरी नहीं रखने दी।
2026 बैच के छात्रों ने यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC), रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने प्रशासन से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। छात्रों का कहना है कि दीक्षांत समारोह में किसी ऐसी शख्सियत को बुलाना चाहिए, जो नागरिक अधिकारों और न्याय के प्रति संवेदनशील हो।
नहीं, छात्रों ने अपने पत्र में यह साफ किया है कि अभी दीक्षांत समारोह की आधिकारिक तारीख और मुख्य अतिथि के नाम का फाइनल ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन वे चाहते हैं कि प्रशासन कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले छात्रों की इस आपत्ति और विरोध को ध्यान में रखे।
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध ‘मुख्य न्यायाधीश’ (CJI) के पद या संस्था के खिलाफ नहीं है। उनका विरोध केवल अदालत के भीतर CJI के व्यक्तिगत आचरण, बयानों और पुलिस बर्बरता के आरोपों के प्रति दिखाई गई कथित उपेक्षा को लेकर है।

