Commonwealth Games 2026: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड स्तर पर पदक अपने नाम किए। इसी सुनहरी कामयाबी का हिस्सा रहीं हरियाणा की बॉक्सर साक्षी चौधरी, जिन्होंने महिलाओं की 51 किलोग्राम कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। साक्षी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था।
गोल्ड मेडल के बाद जब साक्षी भारत लौटीं तो उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा की। इस दौरान उन्होंने भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली का खास तौर पर जिक्र किया और बताया कि उनके करियर में कोहली के समर्थन की अहम भूमिका रही है।
विराट कोहली ने साक्षी के सफर में निभाई अहम भूमिका
साक्षी ने बताया कि वह महान भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह से प्रेरित होकर बॉक्सिंग की दुनिया में आई थीं। आगे के सफर में विराट कोहली का सहयोग भी उन्हें मिला।
साक्षी के मुताबिक, कोहली उनके स्पॉन्सर रहे हैं। उनका सहयोग सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने मुश्किल समय में मानसिक तौर पर भी साक्षी का हौसला बढ़ाया।
बॉक्सर के अनुसार विराट उन्हें दबाव की चिंता करने के बजाय अपनी तैयारी और प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते थे। गोल्ड मेडल जीतने के बाद साक्षी ने इसके लिए कोहली का आभार जताया।
51 किलो में उतरीं और बन गईं चैंपियन
साक्षी की CWG यात्रा इसलिए भी दिलचस्प रही क्योंकि उन्होंने अपनी वजन कैटेगरी में बदलाव का फैसला लिया था। इससे पहले वह 54 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर चुकी थीं।
2025 में उन्होंने 54 किलोग्राम कैटेगरी में वर्ल्ड बॉक्सिंग कप का गोल्ड मेडल भी जीता था। इसके बाद 51 किलोग्राम वर्ग में वापसी का फैसला उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन यह प्रयोग शानदार सफलता में बदल गया।
ट्रायल में दो बड़ी चुनौतियों को किया पार
कॉमनवेल्थ गेम्स की भारतीय टीम में जगह बनाना भी साक्षी के लिए आसान नहीं था। 51 किलोग्राम वर्ग के राष्ट्रीय ट्रायल में उन्हें बेहद मजबूत प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने ट्रायल के दौरान निखत जरीन और मीनाक्षी हुड्डा जैसी शीर्ष भारतीय मुक्केबाजों को हराकर टीम में अपनी जगह पक्की की। इस प्रदर्शन ने उन्हें ग्लासगो में भारत का प्रतिनिधित्व करने का टिकट दिलाया।
CWG में एक भी मुकाबला नहीं गंवाया
ग्लासगो पहुंचने के बाद साक्षी का दबदबा लगातार देखने को मिला। उन्होंने टूर्नामेंट में अपने सभी चार मुकाबले जीते और हर मुकाबले में 5-0 के एकतरफा स्कोर से जीत दर्ज की।
क्वार्टर फाइनल में उन्होंने नॉर्दर्न आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 से हराकर पदक पक्का किया था। इसके बाद उन्होंने अपनी नजर सीधे गोल्ड पर रखी और आखिरकार खिताब अपने नाम कर लिया।
फाइनल में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को दी मात
51 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में साक्षी का सामना इंग्लैंड की रूबी व्हाइट से हुआ। भारतीय मुक्केबाज ने यहां भी शानदार प्रदर्शन किया और जजों के सर्वसम्मत फैसले से 5-0 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
इस जीत के साथ साक्षी ने अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया। इंग्लैंड बॉक्सिंग की आधिकारिक सूची में भी रूबी व्हाइट को महिलाओं के 51 किग्रा वर्ग की मुक्केबाज के तौर पर दर्ज किया गया है।
2022 में चोट ने रोका था रास्ता
साक्षी के लिए यह गोल्ड इसलिए भी खास है क्योंकि 2022 में चोट की वजह से वह कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। इसके बाद उन्होंने वापसी की और लगातार खुद को साबित करते हुए पहले 54 किग्रा वर्ग में सफलता हासिल की।
फिर 51 किग्रा में उतरने का फैसला लिया और राष्ट्रीय ट्रायल से लेकर ग्लासगो तक शानदार प्रदर्शन किया। आखिरकार उनकी मेहनत का नतीजा गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया।
भारतीय बॉक्सिंग का भी रहा शानदार प्रदर्शन
ग्लासगो 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम ने कुल 10 पदक पक्के किए थे, जो पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स के भारतीय बॉक्सिंग प्रदर्शन से बेहतर आंकड़ा रहा। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही भारत ने 10 पदक सुनिश्चित कर लिए थे।
साक्षी चौधरी का गोल्ड इसी शानदार अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। उनके प्रदर्शन ने न केवल भारत को एक और स्वर्ण पदक दिलाया, बल्कि मुश्किल दौर के बाद वापसी की उनकी कहानी को भी खास बना दिया।

