UPI New Rules 2026: UPI पर अब लगेगा चार्ज? लोकसभा से बिल पास, जानिए किस पेमेंट पर देना पड़ सकता है शुल्क

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UPI Charges Update: डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े नियमों में बदलाव का रास्ता खुलता नजर आ रहा है। लोकसभा में पारित हुए संशोधन विधेयक के बाद भविष्य में कुछ प्रकार के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू किए जाने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, हर ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं लगेगा और बड़ी संख्या में भुगतान पहले की तरह निशुल्क बने रह सकते हैं।

किन ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क?

मौजूदा जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (Person to Person – P2P) के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांजेक्शन पर किसी प्रकार का शुल्क लगाने की योजना नहीं है। इसका मतलब है कि परिवार, दोस्तों या परिचितों को पैसे भेजने वाले अधिकांश उपयोगकर्ताओं पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ने की संभावना है।

किन भुगतान पर लग सकता है चार्ज?

जानकारों के अनुसार, Person to Merchant (P2M) और Merchant to Merchant (M2M) श्रेणी के कुछ ट्रांजेक्शन पर शुल्क लागू किया जा सकता है। हालांकि, यह शुल्क कब से लागू होगा, इसकी दर कितनी होगी और किन परिस्थितियों में लिया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर नजर

सूत्रों के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, इस सीमा को लेकर अभी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। अंतिम फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से लिया जाएगा।

कितने ट्रांजेक्शन हो सकते हैं प्रभावित?

वित्त मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 24 हजार करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य 314 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।

इन्हीं आंकड़ों के मुताबिक कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा P2P ट्रांजेक्शन का था। यदि इन्हें शुल्क से बाहर रखा जाता है, तो अधिकांश उपयोगकर्ताओं पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। वहीं शेष 29 प्रतिशत ट्रांजेक्शन मर्चेंट से जुड़े भुगतान की श्रेणी में आते हैं।

छोटे भुगतान करने वालों पर असर कम

आंकड़ों के अनुसार, मर्चेंट श्रेणी में होने वाले अधिकांश भुगतान 500 रुपये तक के हैं, जबकि 2,000 रुपये से अधिक राशि वाले ट्रांजेक्शन का हिस्सा काफी सीमित है। ऐसे में यदि भविष्य में शुल्क लागू भी किया जाता है, तो उसका प्रभाव चुनिंदा बड़े भुगतान पर ही देखने को मिल सकता है।

संशोधन का उद्देश्य क्या है?

नए विधायी बदलाव के तहत Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन का प्रावधान किया गया है। इससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर यूपीआई से जुड़े शुल्क संबंधी नियम तय करने का कानूनी आधार तैयार होगा।

बैंकों को कैसे होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई नेटवर्क को संचालित और सुरक्षित बनाए रखने में बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों का बड़ा खर्च होता है। यदि कुछ श्रेणी के ट्रांजेक्शन पर शुल्क लागू किया जाता है, तो इससे मिलने वाली राशि का उपयोग डिजिटल भुगतान प्रणाली को और मजबूत बनाने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में किया जा सकता है।

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