Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई का असर पाकिस्तान पर कितना गहरा पड़ा था, इसे लेकर सेवानिवृत्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सैन्य अभियान के दौरान पाकिस्तान ने 10 मई की सुबह ही हॉटलाइन के जरिए युद्धविराम (सीजफायर) की अपील की थी, लेकिन भारत ने अपनी रणनीतिक योजना पूरी करने के बाद ही उस अनुरोध पर प्रतिक्रिया दी।
DGMO हॉटलाइन पर पाकिस्तान ने मांगा युद्धविराम
एक कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि 10 मई की सुबह पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से तत्काल सीजफायर की मांग की थी। हालांकि भारतीय पक्ष ने तुरंत जवाब नहीं दिया। उन्होंने बताया कि यह फैसला जानबूझकर लिया गया था, क्योंकि उस समय भारतीय सेना के कुछ तयशुदा सैन्य अभियान अभी पूरे होने बाकी थे।
उनके अनुसार, भारत ने दोपहर तक अपनी कार्रवाई जारी रखी और उसके बाद ही पाकिस्तान के अनुरोध पर जवाब दिया।
9 मई की धमकियों के बाद 10 मई को बातचीत की पहल
जनरल चौहान ने बताया कि एक दिन पहले तक पाकिस्तान की ओर से अगले 48 घंटे में भारत को जवाब देने जैसी बयानबाजी की जा रही थी। लेकिन अगले ही दिन बातचीत और युद्धविराम की पहल पाकिस्तान की तरफ से होना अपने आप में एक बड़ा बदलाव था।
उन्होंने कहा कि घटनाक्रम ने साफ संकेत दिया कि भारतीय कार्रवाई का असर पाकिस्तान पर अपेक्षा से अधिक पड़ा था।
11 सैन्य ठिकानों पर भारत की कार्रवाई
पूर्व CDS के मुताबिक, 9 मई की रात से लेकर 10 मई की दोपहर तक भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 11 महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान कई एयरबेस, रडार सिस्टम, हैंगर और सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने दावा किया कि इस अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना था कि पाकिस्तान का कोई भी रणनीतिक सैन्य अड्डा भारत की पहुंच से बाहर नहीं है।
‘निर्णायक बढ़त सुनिश्चित करना था मकसद’
जनरल चौहान ने कहा कि भारत ने तुरंत युद्धविराम स्वीकार नहीं किया क्योंकि सेना यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि अभियान अपने तय उद्देश्यों तक पहुंचे। उनका कहना था कि यदि संघर्ष आगे बढ़ता तो पाकिस्तान को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता था, इसलिए भारत ने पहले अपने सैन्य लक्ष्य पूरे किए और उसके बाद ही बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
उन्होंने याद दिलाया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। शुरुआती चरण में सीमा पार मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनका संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से बताया गया।
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की गई, जिन्हें भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। इसके जवाब में भारत ने सैन्य ठिकानों पर लक्षित कार्रवाई करते हुए अभियान को आगे बढ़ाया।

