Vehicle Insurance News: यदि भविष्य में आपकी गाड़ी का वैध इंश्योरेंस नहीं होगा, तो पेट्रोल पंप पर ईंधन मिलने में दिक्कत आ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर बड़ी संख्या में बिना बीमा वाले वाहनों के संचालन पर चिंता जताते हुए सुझाव दिया है कि ऐसे वाहनों को ईंधन देने की व्यवस्था को उनके वैध इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जाए। अदालत का मानना है कि इससे नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित होगा और सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में भी मदद मिलेगी।
बिना बीमा वाले वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं, जिससे मोटर वाहन अधिनियम के तहत अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। अदालत ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुर्घटना होने पर पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में पंजीकृत लगभग 30.4 करोड़ वाहनों में से करीब 16.5 करोड़ वाहनों का बीमा नहीं है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े लगभग 22 प्रतिशत मामलों में बिना बीमा वाले वाहन शामिल पाए जाते हैं।
क्या है अदालत का सुझाव?
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें। इस व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले वाहन का वैध इंश्योरेंस डिजिटल रूप से सत्यापित किया जा सकता है।
यदि वाहन का बीमा समाप्त हो चुका हो, तो उसके नवीनीकरण तक ईंधन उपलब्ध न कराने जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है। अदालत के अनुसार, इससे वाहन मालिक समय पर इंश्योरेंस कराने के लिए प्रेरित होंगे और बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान भी आसान होगी।
कैमरों से होगी पहचान, ऑटोमैटिक कट सकता है ई-चालान
पीठ ने यह भी सुझाव दिया कि हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को VAHAN पोर्टल और Insurance Information Bureau के डेटाबेस से जोड़ा जाए।
ऐसी व्यवस्था लागू होने पर कैमरे बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान कर सकेंगे और उनके मालिकों को स्वतः ई-चालान जारी किया जा सकेगा। अदालत ने राज्यों की ट्रैफिक पुलिस को ऐसे डिजिटल उपकरण और मोबाइल एप उपलब्ध कराने की भी बात कही, जिनकी मदद से मौके पर ही वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस जांचा जा सके।
कानून क्या कहता है?
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है।
पहली बार नियम तोड़ने पर तीन महीने तक की जेल, 2,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
दोबारा उल्लंघन करने पर तीन महीने तक की जेल, 4,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
नई गाड़ियों के इंश्योरेंस को लेकर भी अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए अपने निर्देशों में संशोधन करते हुए नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अनिवार्य अवधि बढ़ाने की बात कही है।
अब नई कार खरीदने वालों के लिए चार वर्ष और नए दोपहिया वाहन खरीदने वालों के लिए छह वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य रखने का निर्देश दिया गया है। अदालत का मानना है कि इससे लंबे समय तक वाहन बीमित रहेंगे और दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।

