ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने कोर्ट में ठोका केस,अवैध टैक्स का लगा आरोप

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Trump Tariff: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। देश के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत भारत सहित लगभग 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया गया है।

राज्यों का कहना है कि यह फैसला कानून के दायरे से बाहर है और इसका सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं, कारोबारियों और उद्योगों पर पड़ रहा है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि इन नए टैरिफ पर तत्काल रोक लगाई जाए और अब तक वसूली गई राशि को संबंधित आयातकों को वापस लौटाने का आदेश दिया जाए।

भारत समेत कई देशों पर लगाया गया नया आयात शुल्क

राज्य सरकारों के अनुसार, पिछले महीने ट्रंप प्रशासन ने भारत, यूरोपीय संघ और अन्य कई देशों के उत्पादों पर नए आयात कर लागू किए। प्रशासन का दावा है कि कुछ देश जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं की आपूर्ति रोकने में प्रभावी कदम नहीं उठा पाए, इसलिए यह कार्रवाई की गई।

हालांकि, इस फैसले को लेकर कानूनी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि इससे पहले भी इसी तरह के टैरिफ को लेकर अदालत में विवाद हो चुका है।

क्या है पूरा कानूनी विवाद?

इस मामले में न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स सहित 25 राज्यों के शीर्ष कानूनी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से अदालत का रुख किया है। उनका तर्क है कि इस तरह के अतिरिक्त कर से आम नागरिकों की जेब पर बोझ बढ़ेगा और कारोबार की लागत भी बढ़ेगी।

राज्यों ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल का आधार बनाकर लगाए गए कुछ टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित माना था। उस फैसले के बाद सरकार को कई आयातकों को पहले वसूली गई रकम लौटानी पड़ी थी।

ट्रंप प्रशासन ने अपनाया नया कानूनी रास्ता

इस बार ट्रंप प्रशासन ने अपनी नई टैरिफ नीति को लागू करने के लिए ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 का सहारा लिया है। प्रशासन का कहना है कि यह प्रावधान उन देशों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति देता है, जो अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल हों या जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण न कर पाए हों।

व्हाइट हाउस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम अमेरिकी उद्योग, श्रमिकों और घरेलू व्यापारिक हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है और यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया है।

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