अभी तक आपने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब इथेनॉल से इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी चार्ज हो सकेंगी? दरअसल हैदराबाद में ऐसी तकनीक का उद्धाटन किया गया है, जो इथेनॉल की मदद से इलेक्ट्रिकल गाड़ियों को चार्ज कर सकेगी। इस तकनीक को KETO मोटर्स द्वारा विकसित किया गया है। इस तकनीक की खूबी है कि यह पारंपरिक बिजली और पावर ग्रिड पर निर्भर रहे बिना इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा देती है।
यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें ग्रिड की जगह पर इथेनॉल की मदद से बिजली पैदा की जाती है, जिससे इलेक्ट्रिकल गाड़ियों को चार्ज किया जाता है।
KETO मोटर्स ने इस यूनिट को एक मोबाइल यानी कि चलती-फिरती चार्जिंग फैसिलिटी के तौर पर बनाया है।
इसका मतलब है कि इसे किसी भी जगह पर ले जाकर इलेक्ट्रिकल वाहनों को चार्ज किया जा सकता है।
यह तकनीक वहां काम आ सकती है जहां बिजली के पोल या चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं।
इसके अलावा अगर इलेक्ट्रिकल वाहन ऐसी किसी जगह पर फंस जाते हैं, जहां चार्जिंग स्टेशन मौजूद ना हो, तो भी इस तकनीक की मदद से उन्हें चार्ज कर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जा सकता है।
इस तकनीक को इसलिए खास बताया जा रहा है क्योंकि यह पावर ग्रिड पर दबाव डाले बिना ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देती है।
यह एक पोर्टेबल सॉल्यूशन है जिसे अस्थायी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में कहीं भी तैनात किया जा सकता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से होता है, जिससे भारतीय किसानों को फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा, यह तकनीक पेट्रोलियम और बिजली पर निर्भरता को कम करके पर्यावरण को भी फायदा पहुंचाती है।
इस तकनीक में इथेनॉल यानी कि बायो-फ्यूल को एनर्जी सोर्स के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
इसमें मोबाइल चार्जिंग स्टेशन में लगा जनरेटर या सिस्टम इथेनॉल को जलाकर क्लीन बिजली बनाता है।
इस बिजली को तुरंत फास्ट-चार्जिंग पोर्ट्स के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे बसों, कारों की बैटरियों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
इस पूरे प्रोसेस में ग्रिड या किसी केबल से बिजली लेने की जरूरत नहीं पड़ती। सिस्टम इथेनॉल को जलाकर खुद बिजली बनाता है, जिससे इलेक्ट्रिकल वाहनों को चार्ज किया जाता है।

