Sawan 2026: सावन में पड़ेंगे दो ग्रहण! क्या सोमवार व्रत, जलाभिषेक और रक्षाबंधन की पूजा होगी प्रभावित? जानिए पूजा-पाठ और सूतक को लेकर क्या कहते हैं नियम

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Two Eclipses in Sawan 2026: भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, सावन सोमवार का व्रत रखते हैं और महादेव की विशेष आराधना करते हैं। वर्ष 2026 में सावन का महीना एक विशेष खगोलीय संयोग के कारण चर्चा में है, क्योंकि इस दौरान एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण पड़ने वाले हैं।

ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन ग्रहणों का प्रभाव सावन की पूजा, सोमवार व्रत, जलाभिषेक या रक्षाबंधन जैसे पर्वों पर पड़ेगा? आइए जानते हैं इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

सावन अमावस्या पर लगेगा सूर्य ग्रहण

भारतीय समय के अनुसार, वर्ष 2026 का अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात लगभग 11:17 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह करीब 4:25 बजे समाप्त होगा।

यह ग्रहण सावन अमावस्या (हरियाली अमावस्या) के अवसर पर पड़ रहा है। इस दिन स्नान, दान, शिव पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी माना जाता है जब ग्रहण संबंधित स्थान पर दिखाई देता हो। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में श्रद्धालु सामान्य रूप से शिव पूजा, जलाभिषेक, दान-पुण्य और अन्य धार्मिक कार्य कर सकेंगे।

रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण

दूसरा ग्रहण 28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में पड़ेगा। भारतीय समयानुसार इसकी शुरुआत सुबह 6:53 बजे होगी और इसका समापन दोपहर 12:32 बजे के आसपास होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट रहेगी।

विशेष बात यह है कि इसी दिन सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है, जबकि सावन पूर्णिमा का भी धार्मिक महत्व माना जाता है।

क्या रक्षाबंधन की पूजा पर पड़ेगा असर?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल लागू नहीं माना जाता। चूंकि यह चंद्र ग्रहण भी भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए रक्षाबंधन, राखी बांधने, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर इसका कोई प्रभाव नहीं माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं के लिए क्या है महत्वपूर्ण बात?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भारत में इन दोनों ग्रहणों के दृश्य न होने के कारण श्रद्धालु सावन के सभी व्रत, जलाभिषेक, शिव पूजा, हरियाली अमावस्या, सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के धार्मिक कार्य सामान्य रूप से कर सकते हैं। फिर भी, यदि किसी को व्यक्तिगत धार्मिक परंपराओं या स्थानीय मान्यताओं का पालन करना हो, तो अपने परिवार के पुरोहित या योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह लेना उचित रहेगा।

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