US Iran Conflict: अमेरिका-ईरान तनाव खतरनाक मोड़ पर! कई देशों तक पहुंची जंग की आंच, तेल बाजार में मचा हड़कंप

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US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव कम होने के बजाय लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों और उनके सहयोगी समूहों की ओर से हो रही जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर बना दिया है। इस बढ़ते संघर्ष का असर अब क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, कुवैत में हुए एक हमले में एक चीनी कंपनी में कार्यरत नेपाल के नागरिक की मौत हो गई। वहीं, इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े छह सदस्यों समेत कुल 26 लड़ाकों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।

सऊदी अरब की सक्रिय भूमिका से बढ़ा तनाव

क्षेत्रीय घटनाक्रम में सऊदी अरब की सक्रिय सैन्य भागीदारी के बाद इराक का महत्व और बढ़ गया है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़कर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ी है।

इराक से हुए हमलों के दावे

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, यमन के हूती विद्रोहियों ने इराकी क्षेत्र से सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह और पूर्वी हिस्सों को निशाना बनाने का दावा किया है। उपग्रह तस्वीरों में सऊदी अरब के अबकैक स्थित तेल प्रसंस्करण केंद्र को नुकसान पहुंचने के संकेत मिले हैं। यह संयंत्र प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल के प्रसंस्करण की क्षमता रखता है।

सूत्रों का कहना है कि हूती समूहों को इराक में सक्रिय ईरान समर्थित संगठनों से सहयोग मिल रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इराक क्यों बनता जा रहा है रणनीतिक केंद्र?

विश्लेषकों का मानना है कि सीरिया और लेबनान में ईरान समर्थित संगठनों की स्थिति कमजोर होने के बाद इराक की रणनीतिक अहमियत काफी बढ़ गई है। सऊदी अरब से लगी लगभग 800 किलोमीटर लंबी सीमा के कारण यह इलाका सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

इसी बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ प्रस्तावित बैठक भी स्थगित कर दी, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर पड़ा है।

जवाबी कार्रवाई और बढ़ा विवाद

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सऊदी अरब पर हुए ड्रोन हमलों के बाद पूर्वी इराक में पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) के हथियार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।

अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इन समूहों ने 72 घंटे के भीतर लगभग 30 ड्रोन हमले किए थे, जिसके बाद संयुक्त जवाबी कार्रवाई की गई।

हालांकि, इराकी अधिकारियों ने इस अभियान पर सवाल उठाए हैं। इराकी सेना के प्रवक्ता सबा अल-नुमान ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि सऊदी अरब पर हुए हमलों का संबंध इराकी क्षेत्र से कैसे जोड़ा गया।

वहीं, ईरान समर्थित अल-वाद अल-सादेक समूह के प्रमुख मोहम्मद तमीमी ने चेतावनी दी कि आगे किसी भी हमले का जवाब उसी स्तर पर दिया जाएगा।

ट्रंप प्रशासन और सऊदी की बैठक के बाद बढ़ी गतिविधियां

रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की थी।

इसके बाद इराक में ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज हुई। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

CENTCOM ने भी दावा किया है कि खाड़ी क्षेत्र में ईरानी प्रभाव को सीमित करने के उद्देश्य से IRGC से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया।

मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमला

रिपोर्टों के मुताबिक, मिस्र के दैमिएता बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमले में प्राकृतिक गैस ले जा रहे दो टैंकरों में आग लग गई। इनमें एक जहाज अमेरिका और दूसरा ग्रीस से जुड़ा बताया गया है।

हालांकि, अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। बंदरगाह प्रशासन ने कहा कि घटना के बावजूद संचालन सामान्य रूप से जारी है।

होर्मुज और लाल सागर में बढ़ी हलचल

अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई करने का दावा किया है, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बरकरार रहने की बात दोहराई है।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उनकी निगरानी कायम है और बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले कुछ जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेजा गया।

दूसरी ओर, उपलब्ध शिपिंग डाटा के अनुसार हाल के दिनों में कतर से एलएनजी लेकर एक टैंकर इस मार्ग से सफलतापूर्वक गुजर चुका है।

उधर, लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां भी जारी हैं। वहीं जॉर्डन ने दावा किया है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रही कई मिसाइलों को मार गिराया।

ईरान में हमले और चीन से रक्षा उपकरणों की चर्चा

रिपोर्टों में ईरान के विभिन्न इलाकों में सैन्य ठिकानों पर हमलों और कुछ लोगों के हताहत होने की जानकारी दी गई है।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि ईरान को चीन से कंधे पर दागे जाने वाले एयर डिफेंस मिसाइल लॉन्चरों की पहली खेप मिल सकती है। हालांकि, इस संबंध में चीन और ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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