किसी भी बड़े विरोध-प्रदर्शन या मार्च के दौरान अक्सर देखा जाता है कि लोगों के मोबाइल फोन के नेटवर्क गायब हो जाते हैं। ऐसा ही बीते सोमवार जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाके में भी हुआ। दलअसल 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी का संसद चलो मार्च था और रिपोर्टस के अनुसार इस दौरान पुलिस ने नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नेटवर्क जैमर होता क्या है और कैसे इसकी वजह से किसी इलाके में नेटवर्क पूरी तरह से गायब हो जाते हैं।
डिटेल में समझते हैं कि एक छोटी सी मशीन कैसे मोबाइल टावर और आपके फोन के बीच का संपर्क तोड़ देती है? और क्या इसके रहते मोबाइल पर किसी तरह से सिग्नल आ सकते हैं?
जैमर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो मोबाइल फोन, वाई-फाई और जीपीएस के सिग्नलों को ब्लॉक करने का काम करता है।
यह डिवाइस उन फ्रीक्वेंसी पर तेज रेडियो सिग्नल छोड़ता है, जिस फ्रीक्वेंसी पर मोबाइल टावर और फोन आपस में कनेक्ट होते हैं।
जैमर से निकलने वाली नॉइस या तरंगे मोबाइल टावर के सिग्नल को दबा देती है। इससे फोन के टावर से संपर्क टूट जाता है और फोन नो सर्विस दिखने लगता है।
जिस एरिया में नेटवर्क जैमर को चालू किया जाता है वहां सभी कॉलिंग, मैसेज और इंटरनेट डेटा पूरी तरह ठप हो जाते हैं।
ये जैमर 10-20 मीटर कवर करने वाले छोटे आकार से लेकर कई किलोमीटर के दायरे वाले हाई-पावर जैमर के आकार में भी आते हैं।
हर फोन अपने नजदीकी फोन टावर से जुड़ने के लिए खास रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है। नेटवर्क जैमर उस फ्रीक्वेंसी को टारगेट करता है।
जैसे ही जैमर को चालू किया जाता है, यह तय एरिया में बहुत तेज और हाई-पावर रेडियो तरंगे छोड़ने लगता है।
जैमर से निकलने वाली तरंगे मोबाइल टावर से आने वाले सिग्नल को दबा देती हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे किसी कमरे में बहुत तेज आवाज में लाउडस्पीकर चला दे और बाकी आवाजें सुनाई देना बंद हो जाएं।
जैमर के सिग्नल से मोबाइल फोन और टावर के बीच कनेक्शन टूट जाता है। इसके बाद फोन पर नो सर्विस दिखने लगता है।
जैसे ही जैमर को बंद या बंद किया जाता है, मोबाइल फोन अपने आप दोबारा पास के टावर से कनेक्ट हो जाते हैं और नेटवर्क सामान्य हो जाता है।
जैमर की तकनीक इस तरह से काम करती है कि उसकी रेंज में कोई भी फोन सिग्नल नहीं पकड़ सकता।कई लोग मानते हैं कि जैमर की रेंज में रहते हुए इमरजेंसी कॉल्स की जा सकती हैं लेकिन नेटवर्क पूरी तरह से ब्लॉक हो जाने की वजह से उस दौरान इमरजेंसी कॉल्स भी नहीं की जा सकतीं।
जब तक आप जैमर की तय रेंज से बाहर नहीं चले जाते या जैमर की पावर इतनी कम हो कि टावर का सिग्नल उससे ज्यादा मजबूत हो, तभी फोन में थोड़ा-बहुत नेटवर्क आ सकता है। वरना जैमर के एक्टिव रहते सिग्नल मिलना नामुमकिन होता है।

