कॉम्फेड और जीविका की बड़ी पहल: 7 हजार महिलाओं को मिला डेयरी और पशुपालन का प्रशिक्षण, अब गांव-गांव पहुंचेगा रोजगार का नया मॉडल

0
42

Bihar News: बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन (कॉम्फेड) ने करीब 7,000 जीविका दीदियों को डेयरी और पशुपालन का विशेष प्रशिक्षण दिया है। अब ये प्रशिक्षित ‘पशु सखियां’ अपने-अपने गांवों में स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक पशुपालन और डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार को बढ़ावा देंगी।

महिला रोजगार योजना को मिलेगा नया बल

यह पहल मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (MMRY) के तहत ग्रामीण विकास विभाग के अधीन कार्यरत बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की संस्था कॉम्फेड के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराना है।

1.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को मिल चुकी पहली किस्त

योजना के अंतर्गत राज्य की 1.5 करोड़ से अधिक जीविका दीदियों को निर्धारित वित्तीय सहायता की पहली किस्त उपलब्ध कराई जा चुकी है। अब इन महिलाओं को कृषि, डेयरी, पशुपालन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ने के लिए चरणबद्ध तरीके से कौशल प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी आय में स्थायी वृद्धि कर सकें।

पहले चरण में तैयार हुईं ‘पशु सखियां’

प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में पशु सखियों, आजीविका विशेषज्ञों और प्रत्येक प्रखंड के सामुदायिक स्तर के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया। यह प्रशिक्षण राज्य के विभिन्न जिलों में कॉम्फेड के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित किया गया। इसके लिए जीविका और कॉम्फेड ने जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की भी नियुक्ति की।

अब गांव-गांव महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

जीविका ने सभी प्रखंड परियोजना प्रबंधकों को निर्देश दिया है कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी पशु सखियां अब अपने गांवों में डेयरी गतिविधियों से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों को नियमित प्रशिक्षण दें। ग्राम संगठन और सामुदायिक प्रेरक इस अभियान में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रशिक्षण का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।

डेयरी के साथ बकरी, भेड़ और सूअर पालन की भी मिलेगी जानकारी

यह प्रशिक्षण केवल डेयरी तक सीमित नहीं रहेगा। महिलाओं को बकरी, भेड़, सूअर और अन्य लघु पशुपालन से जुड़े आधुनिक तरीकों की भी जानकारी दी जाएगी। अलग-अलग प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से महिलाओं को पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय में बदलने की तकनीक, प्रबंधन और देखभाल के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

सरकार का मानना है कि इस पहल से महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे, दूध उत्पादन और पशुपालन गतिविधियों का विस्तार होगा तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गांवों में टिकाऊ आजीविका और महिला सशक्तीकरण को भी नई गति मिलेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here