Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक और भव्य रथयात्रा का शुभारंभ आज, 16 जुलाई से चित्रकूट में होने जा रहा है। लगभग तीन शताब्दियों से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा स्थानीय लोगों की आस्था, संस्कृति और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। नौ दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
जगदीश मंदिर से निकलेगी रथयात्रा
आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर यात्रा की शुरुआत तरौंहा स्थित जगदीश मंदिर से होगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सुसज्जित रथों को श्रद्धालु रस्सियों की सहायता से खींचेंगे। पूरे मार्ग में पुष्प वर्षा, भजन-कीर्तन और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहेगा।
नौ दिनों तक तय करेगा अलग-अलग पड़ाव
मंदिर से निकलने के बाद रथयात्रा पहले दिन पुरानी बाजार स्थित धुस मैदान पहुंचेगी। दूसरे दिन यात्रा कच्ची छावनी और तीसरे दिन एलआईसी चौराहा तक पहुंचेगी। इसके बाद रथ सोनेपुर होते हुए पंचमी के दिन गुंडिचा धाम पहुंचेगा।
गुंडिचा धाम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और यहां विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है। षष्ठी से यात्रा वापसी शुरू करेगी और नौवें दिन पुनः जगदीश मंदिर पहुंचकर इसका समापन होगा।
पीढ़ियों से निभाई जा रही आस्था की परंपरा
स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। कई परिवार पीढ़ियों से इस रथयात्रा का हिस्सा बनते आ रहे हैं। बुजुर्ग श्रद्धालु आज भी पूरे उत्साह के साथ रथ खींचकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
मेले और भंडारे का रहेगा विशेष आकर्षण
रथयात्रा के दौरान लगने वाला सोनेपुर मेला क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु जुटते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ स्थानीय संस्कृति की भी झलक देखने को मिलती है।
यात्रा के समापन पर मंदिर के अखाड़ा परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जहां हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। यह आयोजन सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है।
श्रद्धालुओं में उत्साह
हर वर्ष की तरह इस बार भी रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन ने भी यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी होता है।

