US Iran Conflict: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए, जिनमें शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना
ईरानी सरकारी मीडिया और सैन्य सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी हमले मुख्य रूप से सैन्य अड्डों, मिसाइल प्रतिष्ठानों और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर केंद्रित थे। इन हमलों में सुरक्षा बलों के साथ-साथ कुछ नागरिकों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
ईरान का सख्त रुख, बातचीत से फिलहाल इनकार
हमलों के बाद ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि इस समय देश की प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह की वार्ता या समझौते पर विचार नहीं किया जा रहा है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और आवश्यक होने पर जवाब देने की बात कही है।
होर्मुज क्षेत्र की घटनाओं के बाद बढ़ा टकराव
विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तनाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुई घटनाओं के बाद और बढ़ गया है। अमेरिका का कहना है कि उसके हमले हाल की सुरक्षा घटनाओं के जवाब में किए गए, जबकि क्षेत्र से दोनों पक्षों की ओर से मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की भी खबरें सामने आ रही हैं। इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।
भारत ने ईरानी उपराजदूत को किया तलब
ईरान से जुड़े ताजा घटनाक्रम में दो भारतीय नागरिकों की मौत की खबरों के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी उपराजदूत को विदेश मंत्रालय में बुलाकर अपनी गंभीर चिंता और आपत्ति दर्ज कराई।
विदेश मंत्रालय ने इस मामले में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पूरी स्थिति पर स्पष्टीकरण भी मांगा।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नागरिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित किया जाना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और हिंसा रोकने की अपील की।
भारत ने शांति और कूटनीति पर दिया जोर
भारत ने सभी संबंधित देशों से जल्द से जल्द सैन्य टकराव समाप्त कर संवाद और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और वैश्विक व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए बातचीत ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
पिछले कुछ सप्ताहों में भी भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नागरिक जहाजों पर हमलों को लेकर अपनी चिंता कई बार व्यक्त कर चुका है।

