Money Saving Tips: हर महीने वेतन मिलने के बाद अधिकांश लोग अपनी बची हुई रकम सीधे सेविंग्स अकाउंट में छोड़ देते हैं। कई लोगों के खाते में 10 लाख, 20 लाख या उससे भी अधिक राशि लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के पड़ी रहती है। आम धारणा यही होती है कि बैंक में रखा पैसा पूरी तरह सुरक्षित है, इसलिए उसे वहीं रहने देना सबसे बेहतर विकल्प है।
हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से अधिक धन को लंबे समय तक सेविंग्स अकाउंट में रखना समझदारी नहीं है। ऐसा करने से आपकी पूंजी सुरक्षित तो रहती है, लेकिन समय के साथ उसकी वास्तविक कीमत लगातार कम होती जाती है।
महंगाई आपकी बचत की ताकत को धीरे-धीरे कर देती है कमजोर
अधिकांश बैंक सेविंग्स अकाउंट पर करीब 2.5% से 3% सालाना ब्याज देते हैं। दूसरी ओर, देश में औसतन महंगाई दर लंबे समय में लगभग 5% से 6% के बीच रहती है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि आपके खाते में रकम बढ़ती जरूर दिखाई देती है, लेकिन उसकी खरीदने की क्षमता लगातार घटती रहती है। यानी आने वाले वर्षों में उसी पैसे से आप आज की तुलना में कम सामान और सेवाएं खरीद पाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पैसा सुरक्षित रखना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी वास्तविक वैल्यू को भी बनाए रखना जरूरी है।
10 लाख रुपये का उदाहरण समझिए
मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये सेविंग्स अकाउंट में जमा कर रखे हैं और बैंक आपको उस पर 2.5% वार्षिक ब्याज दे रहा है। ऐसे में 10 वर्षों बाद आपकी रकम लगभग 12.8 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
लेकिन यदि इसी अवधि में महंगाई की औसत दर 6% रहती है, तो आज जैसी जीवनशैली बनाए रखने के लिए आपको लगभग 17.9 लाख रुपये की आवश्यकता होगी। यानी ब्याज मिलने के बावजूद आपकी बचत वास्तविक रूप से करीब 5 लाख रुपये पीछे रह जाएगी।
यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार केवल ब्याज देखने के बजाय वास्तविक (Real) रिटर्न पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।
सेविंग्स अकाउंट में कितना पैसा रखना सही माना जाता है?
वित्तीय योजनाकारों के अनुसार सेविंग्स अकाउंट का मुख्य उद्देश्य रोजमर्रा की जरूरतों और आकस्मिक परिस्थितियों के लिए नकदी उपलब्ध कराना होता है।
आमतौर पर 6 से 12 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर राशि इमरजेंसी फंड के रूप में सेविंग्स अकाउंट में रखना पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा यदि आपके पास अतिरिक्त पैसा है और निकट भविष्य में उसकी जरूरत नहीं है, तो उसे बेहतर रिटर्न देने वाले निवेश विकल्पों में लगाने पर विचार किया जा सकता है।
बेहतर रिटर्न के लिए ये विकल्प हो सकते हैं फायदेमंद
लंबी अवधि तक अतिरिक्त रकम सेविंग्स अकाउंट में रखने के बजाय निवेशकों के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें लिक्विड फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), डेट फंड और लंबी अवधि के लिए इक्विटी आधारित निवेश प्रमुख माने जाते हैं।
इन माध्यमों में निवेश करने से महंगाई को मात देने की संभावना बढ़ जाती है और आपकी पूंजी समय के साथ बेहतर गति से बढ़ सकती है।

