UP News: यूपी में बड़ा प्रशासनिक बदलाव! कार्यकाल खत्म होते ही 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को मिली नई जिम्मेदारी

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UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों के संचालन को लेकर अहम प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद संबंधित जिला पंचायतों का प्रशासक (Administrator) नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। यह व्यवस्था नई जिला पंचायतों के गठन तक प्रभावी रहेगी।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए उन्हें बड़े नीतिगत या दीर्घकालिक फैसले लेने की अनुमति नहीं होगी।

पांच साल का कार्यकाल पूरा, उसके बाद नई जिम्मेदारी

वर्ष 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद जिला पंचायतों की पहली बैठक 12 जुलाई 2021 को आयोजित हुई थी। इसी आधार पर जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच वर्षीय कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को पूरा हो रहा है।

कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद शासन ने यह नया आदेश जारी किया, ताकि नई पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक कामकाज बिना किसी बाधा के चलता रहे।

इस बार नहीं होंगे DM प्रशासक

अब तक परंपरा यह रही है कि जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) को प्रशासक बनाया जाता था और वही जिला पंचायत का संचालन करते थे।

लेकिन इस बार सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। इससे वे नियमित प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं की निगरानी करते रहेंगे।

क्या होंगे प्रशासकों के अधिकार?

सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रशासक बनाए गए जिला पंचायत अध्यक्ष केवल नियमित प्रशासनिक और विकास कार्यों से जुड़े फैसले ही ले सकेंगे।

उन्हें नई योजनाएं शुरू करने, बड़े वित्तीय निर्णय लेने या किसी महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव को मंजूरी देने का अधिकार नहीं होगा।

ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायतों में भी नई व्यवस्था

सरकार इससे पहले ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह का निर्णय ले चुकी है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया था।

अब यही व्यवस्था जिला पंचायतों में लागू की गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र पंचायतों और ब्लॉक स्तर पर भी इसी मॉडल को अपनाया जा सकता है।

ब्लॉक प्रमुखों पर भी जल्द हो सकता है फैसला

प्रदेश के ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सरकार उनके लिए भी इसी तरह का आदेश जारी कर सकती है, ताकि नई व्यवस्था बनने तक प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।

पंचायती राज मंत्री ने बताई वजह

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से उन्हें प्रशासक नियुक्त किया गया है। इससे विकास कार्य और जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाएं बिना रुकावट जारी रह सकेंगी।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का मामला अदालत में

इस बीच, ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के सरकार के फैसले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दायर की गई है।

अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि यह व्यवस्था किस कानूनी प्रावधान के तहत लागू की गई है और यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कैसे है। साथ ही उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की संबंधित धारा की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने वर्ष 2000 के ‘प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले का भी उल्लेख किया। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में कानून से जुड़े प्रश्नों को खुला छोड़ते हुए अपील का निस्तारण किया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को प्रस्तावित है, जिस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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