भूपेंद्र यादव पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के चुनाव प्रभारी थे। यहां इन्होंने और उनके सचिवीय और अन्य कर्मचारियों ने जबरदस्त रणनीति तैयार की और पहली बार पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। इसके बाद पश्चिम बंगाल के टीएमसी विधायक बागी बने और बाद में टीएमसी के सांसद भी बागी हो गए। पश्चिम बंगाल में मिली इस बड़ी सफलता के पीछे भूपेंद्र यादव और उनके सचिवों ही रणनीति थी या दरअसल यह सब कुछ पीएम मोदी अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी का किया धरा था। इसका मूल्यांकन सीधे-सीधे नहीं किया जा सकता है,क्योंकि वहां सबकुछ साथ साथ चल रहा था ,लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली इस इस प्रचंड जीत से भूपेंद्र यादव और उनके सचिवों को शायद यह लगने लगा कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के पीछे सिर्फ और सिर्फ इनकी ही करामात है और किसी का नहीं। फिर यह अपने आप को तीस मार खान समझने लगे। इन्हें पीएम मोदी और अमित शाह का भी डर नहीं रहा और ये मनमानी पर उतर आये।
इनके कारनामों की सारी सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय को समय-समय पर मिल जाया करती थी, भले ही यह इस बात को नहीं जानते थे। प्रधानमंत्री कार्यालय से यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी जाती थी, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री इनके सुधारने की बाट जोहते रहे। इधर-उधर भूपेंद्र यादव और उनके सचिवों की टीम भी मनमाने निर्णय लेती चली जा रही थी। ऐसे में जब पानी सर से ऊपर बहने लगा तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पीएमओ हरकत में आया और पश्चिम बंगाल चुनाव जीतने के बाद इन्हें पुरस्कृत करने की जगह पर भारी दंड दे दिया। भूपेंद्र यादव को तो सीधे-सीधे कोई दंड नहीं दिया गया ,लेकिन उनके चार सचिवों को एक साथ हटा देने जैसी बड़ी कार्रवाई कर पीएमओ ने उन्हें भी एक प्रकार से अपने औकात में रहने की चेतावनी दे दी है। भूपेंद्र यादव और उनके सचिवों के लिए ही नहीं नरेंद्र मोदी ने यह कार्रवाई कर अपनी सरकार के अन्य मंत्रियों और उनके सचिवों तथा सहायकों को भी अपने औकात में रहने की बड़ी चेतावनी दे दी है।
अरावली पहाड़ी इलाके में निजी कंपनियों को खनन अनुमति देने के विवादित मामले के बाद अब एक बार फिर मोदी सरकार के मंत्री भूपेंद्र यादव घिरते नजर आ रहे हैं। नीट पेपर लीक, कृषि राज्य मंत्री द्वारा 99 लाख की सब्सिडी खुद के खेत पर लेने और राम मंदिर चंदा चोरी आदि मामलों के सामने आने से घबराई मोदी सरकार ने अपने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की टीम के 3 निजी सचिवों सहित सभी निजी कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हटा दिया है। केंद्र सरकार ने वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को हटाने के साथ ही विस्तृत जांच शुरू की है। ये तीनों सचिवीय अधिकारी पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की टीम का अहम हिस्सा थे। इन्हें मिलाकर अब तक भुपेंद्र यादव के 3 निजी सचिवों, चार अतिरिक्त निजी सचिवों के साथ ही ऐसे सभी नियुक्त कर्मियों को बर्खास्त किया जा चुका है।
जानकारी के अनुसार केंद्रिय पर्यावरण मंत्री के ऑफ़िस में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात सीधे पीएमओ के संज्ञान में आई थी जिसके बाद मंत्री के अतिरिक्त निजी सचिव सिद्धार्थ यादव को बर्खास्त कर दिया गया। भूपेंद्र यादव के ऑफ़िस से अब तक कुल चार लोगों को अचानक हटाए जाने से बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से मॉनिटर किया जा रहा है। सिद्धार्थ यादव 1 जुलाई 2024 से भूपेंद्र यादव के बतौर अतिरिक्त निजी सचिव उनकी टीम का हिस्सा बने थे। सिद्धार्थ यादव से पहले भूपेंद्र यादव के प्राइवेट सेक्रेटरी अमर सिंह, एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी शैलेश कुमार सिंह और एक अन्य आयुष सरन को भी इन्हीं आरोपों में हटाया गया था। ये सभी लोग मंत्री भुपेंद्र यादव के अहम सहयोगी रहे हैं। इनमें से आखिरी तीन भूपेंद्र यादव के ऑफिस से तब से जुड़े हैं जब वे पिछली बार श्रम और रोजगार मंत्री थे।
सूत्रों का कहना है कि भूपेंद्र यादव की टीम का हिस्सा रहे इन कर्मचारियों के पास फैसले लेने की काफी ताकत आ गई थी। इन्होंने पद पर रहते हुए कुछ ऐसे काम किए जिन्हें सरकार के कामकाज में इनका हद से ज्यादा दखलअंदाजी माना गया। हालांकि मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस फेरबदल पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन माना जा रहा कि इन लोगों ने नियमों को ताख पर रखकर कुछ ऐसे काम करने की कोशिश की जो सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती थी। ऐसे में पहले से राम मंदिर चढ़ावा चोरी, नीट पेपर लीक आदि आरोपों से घबराई पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार आगे किसी नए मामले में कलंक की कालिख लपेटने का रिस्क नहीं ले सकती थी।

