ताजमहल में तेजो महालय मंदिर मुद्दे पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI से मांगा जवाब

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में ताजमहल में मंदिर होने के दावे को लेकर सुनवाई हुई।इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि इस याचिका में ताजमहल परिसर में ‘अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय’ मंदिर होने की घोषणा की मांग की गई है।
ताजमहल में मंदिर होने के दावे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में दायर एक रिट याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह याचिका 3 जुलाई को अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर, सीनियर एडवोकेट हरि शंकर जैन समेत 5 लोगों की ओर से दाखिल की गई थी।

सुनवाई के दौरान हरि शंकर जैन ने कोर्ट के सामने दलील दी कि विवादित परिसर की फोटोग्राफी कराने और एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के लिए निचली अदालत में आवेदन किया गया था। लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उनके इस आवेदन को गलत तरीके से खारिज कर दिया। इसके बाद इनके पुनर्विचार याचिका को भी सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया गया।

हरि शंकर जैन ने कोर्ट से कहा कि इस पूरे विवाद के सही निपटारे के लिए परिसर का सर्वे और फोटोग्राफी कराना बेहद जरूरी है।
हरि शंकर जैन की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने केंद्र सरकार और ASI को इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा।इसके साथ ही साथ ही अदालत ने इस रिट याचिका में प्रतिवादी नंबर 4 पंकज कुमार वर्मा को भी नोटिस जारी किया है।
दरअसल आगरा जिला अदालत के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और अतिरिक्त जिला जज ने ताजमहल परिसर का सर्वे करने के लिए एडवोकेट कमीशन गठित करने का आदेश देने से इन्कार कर दिया था। यह याचिका उन आदेशों के खिलाफ ही दायर की गई है।
ताजमहल को लेकर 2015 में एक मुकदमा दर्ज किया गया था, जो अब भी आगरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित है। इस मुकदमे में यह घोषित करने की मांग की गई है कि ताजमहल के परिसर में अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय का मंदिर मौजूद है। इसी मुकदमे के लंबित रहने के दौरान एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की अर्जी लगाई गई थी, जिसे दोनों जिला अदालतों ने नामंजूर कर दिया था।अब जिला अदालतों के इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

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