पीएम मोदी का बड़ा खेल, सारे विरोधी हो गए फेल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 ईस्वी में भारत के प्रधानमंत्री के पद पर आसीन होने के बाद से लेकर अब तक की 12 वर्षों में नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के खुद की या अपने समर्थक एनडीए के परियां की 22 राज्यों में सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की। ऐसे में विपक्षी राजनीतिक दलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ताच्युत करने की अकुलाहट का होना स्वाभाविक है। इस अकुलाहट मैं आकर विपक्षी राजनीतिक दलों के राजनेता पीएम मोदी के विरोध के साथ-साथ देश विरोध तक पर उतर आते हैं। तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं ,जिससे पीएम मोदी सत्ता से बाहर हो जाए लेकिन पीएम मोदी अपनी काबिलियत के बल पर इन लोगों को देश के लोगों केदिल से ही बाहर कर देते हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में तो बीजेपी या उनके गठबंधन के दलों के नेतृत्व वाली 22 राज्यों में सरकार बन गई लेकिन विपक्षी राजनीतिक दलों की बनी हुई सरकार भी लगातार गिरती चली गई,यानी जनता ने इन्हें नकार दिया।

सोनिया और राहुल के नेतृत्व वाली कांग्रेस तो कम से कम केरल में सत्ता मिलने के कारण भद् पीटने से बच गई। लेकिन आम आदमी की पार्टी होने का दावा करने वाले अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी पार्टी की तो पूरी तरह से भद् पिट गई।

आम आदमी पार्टी की दिल्ली की सरकार तो गई ही पंजाब के सरकार पर भी आफत मंडरा रहा है। आम आदमी पार्टी के सांसद टूट कर बीजेपी से मिल रहे हैं, ऐसे में अब तो सरकार के साथ-साथ इस पार्टी के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की स्थिति तो आप इस समय देख ही रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा का चुनाव जीत लिया और वहां तृणमूल कांग्रेस से ही भारतीय जनता पार्टी में आए शुभेंदु अधिकारी जिन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी को चुनाव में हराया था, उन्हें पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बना दिया। इसके बाद तो मानो ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस में बड़ा भूचाल आ गया। 80 में से 60 विधायक बागी हो गए और उनके नेता रितुव्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल में नेता विपक्ष का पद भी दे दिया गया। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और एक पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया मैं विलय कर लिया और भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करने लगी। सिर्फ विधायक और सांसद ही नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों में से भी ज्यादा करने तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ लिया। इन लोगों ने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी दफ्तर पर कब्जा कर लिया और अब उसके खजाने पर दावा ठोक दिया है। डर तो इस बात तक का होने लगा है कि कहीं तृणमूल कांग्रेस पार्टी ममता बनर्जी के हाथ से छीनकर इन बागियों के हाथ में ना चला जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले और दूसरे कार्यकाल में तो इनके नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी ने इतना बड़ा बहुमत जुटा लिया कि कोई भी विपक्षी राजनीतिक दल अपने नेता को नेता विपक्ष बनाने की स्थिति में ही नहीं रहा। अब पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले तीसरी सरकार में कांग्रेस को राहुल गांधी को नेता विपक्ष बनाने में सफलता मिली है, तो ये इसकी गरिमा को ही नहीं समझ पा रहे हैं और पीएम नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए ऐसी ऐसी कवायदें कर रहे हैं, ऐसी ऐसी बयान बाजी कर रहे हैं,जिससे यह खुद ही हल्का होते चले जा रहे हैं और पीएम मोदी मुस्तैदी से शासन चलाते चले जा रहे हैं।

सबसे पहले राहुल गांधी ने जाति- पाति का राग अलापना शुरू किया , फिर इसमें वोट चोरी का मुद्दा जोड़ दिया। लेकिन जनता ने राहुल गांधी के इस देश विरोधी मुद्दों पर अपनी चुनाव जीतने की चाल को पकड़ लिया और बिहार के चुनाव में कांग्रेस की तो दुर्गति हुई ही आरजेडी को भी इन्होंने कहीं का नहीं रहने दिया।
इसके बाद राहुल गांधी एप्सटिन फाइल में पीएम मोदी का नाम आने की बात कह कर संसद में ऐसा बम फोड़ने की बात करने लगे ,जिससे पीएम मोदी की सरकार 6 महीने के अंदर चली जाएगी। नेपाल में जब जेन जी का आंदोलन हुआ और वहां सरकार बदली तब राहुल गांधी भी जल्दी ही भारत में बांग्लादेश और नेपाल की तरह बड़ा जेन जी आंदोलन होने की बात करने लगे और 6 महीने के अंदर पीएम मोदी की सरकार जाने की बात करने लगे ताकि पश्चिम बंगाल के चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। हालांकि उनका यह अभियान भी पहले ही अभियान की तरह फुस्स हो गया।
बात जेन जी की निकली है तो मैं यहां एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं और राहुल गांधी भी इस बात को मुद्दा बना रहे हैं। यह बात नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने से संबंधित है। यह नरेंद्र मोदी सरकार की बड़ी विफलता है, क्योंकि इससे कई नौजवानों की उम्मीदों पर पानी फिर और क्यों ने तो इस वजह से अपने प्राण ही त्याग दिए। पहले तो नरेंद्र मोदी की सरकार के मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे तवज्जो ही नहीं दिया और जब तवज्जो दिया भी तो यह मामला बाद की परीक्षाओं में भी रुक नहीं रहा है। युवाओं में इसे लेकर खासा रोष है और इस रोष का राजनीतिक लाभ उठाने में राहुल गांधी लगे हुए हैं, लेकिन फिर डर वही लगता है कि कहीं पुराने अंदाज में उन्होंने इसे भी मुद्दा बनाने का प्रयास किया तो बीजेपी उनके इस प्रयास को भी निष्प्रभावी कर देगी और नौजवानों का मुद्दा जहां का कहां धरा रह जाएगा।

राहुल गांधी और और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी राजनेता इन दोनों नरेंद्र सरेन्डर का मुद्दा भी बड़े जोर-जोर से उठा रहे हैं। इनका कहना है की डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी की दुखती रग पर हाथ रख दिया है और इनसे जैसी मर्जी होती है वैसा काम करवाते हैं। प्रतीकात्मक रूप में इनका कहना यह है कि एप्सटिन फाइल में पीएम मोदी से जुड़ी कुछ ऐसी चीज डोनाल्ड ट्रंप के हाथ लगी है,जिसके लीक कर देने से पीएम मोदी की कुर्सी तुरंत चली जाएगी। इस बात का उदाहरण देते हुए ये कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें रुस से तेल खरीदने की मनाही कर दी है तो इन्होंने रुस से तेल खरीदना बंद कर दिया है।
पीएम मोदी ने हालांकि राहुल गांधी या अरविंद केजरीवाल के द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे खुद के सरेंडर कर दिए जाने की बात बात को लेकर कोई सफाई नहीं दी, लेकिन अपने कर्तव्यों से उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री का चमकता चेहरा जरूर प्रस्तुत कर दिया।

इस सिलसिला में एक तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 महीने तक डोनाल्ड ट्रंप के चाहने पर भी ना तो उनसे मुलाकात की और ना ही फोन पर कोई बात की। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार उन्हें खुद से मिलने के लिए आमंत्रित किया और कई बार फोन लगाकर सीधे बातचीत करने का प्रयास किया लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोई भाव नहीं दिया।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरी दुनिया में क्या दमखम है और डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें कितना अपने लपेटे में लिया है,यह यह फ्रांस में हुए G-7 की बैठक में देखने को मिला। भारत G-7 का सदस्य देश नहीं है इसके बावजूद भारत को बार-बार G-7 की बैठक में बुलाया जाता है। फ्रांस में आयोजित G-7 की बैठक में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभा स्थल पर पहुंचे तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वहां अपनी कुर्सी पर बैठ चुके थे। तब जब नरेंद्र मोदी वहां पहुंचे और उन्होंने बाएं हाथ से अपनी कुर्सी बैठने के लिए खिसकाई तो डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते हुए उठ खड़े हुए। यहां भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी आंख में आंख मिलाकर बात की। अमेरिकी सेना के द्वारा भारत के नागरिकों की हत्या का मामला भी उन्होंने वहां उठा दिया और डोनाल्ड ट्रंप से सख्त लहजे में कह दिया कि यह सब नहीं चलेगा।

रही बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा रुस से तेल खरीदने की मनाही करने पर भारत द्वारा रुस से तेल खरीद रोक देने की तो भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कहने पर कभी ऐसा नहीं किया और यह जब से रूस ने सस्ते दर पर क्रूड ऑयल देना शुरू किया है तब से भारत लगातार बड़ी मात्रा में रूस से तेल आयात कर रहा है। और हार्मुज संकट के बाद तो भारत ने रूस से और ज्यादा तेल खरीदना प्रारंभ कर दिया है, ताकि भारत में आपातकालीन पेट्रोलियम पदार्थों की जरूरत को पूरा करने के लिए एक बड़ा रिजर्व बनाया जा सके।

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