हमारे देश में कई ऐसे कानून हैँ जिसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जाता है।कुछ कानून तो ऐसे हैं ,जिसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर विदेशों से पैसे मंगाकर उसका दुरूपयोग अपने ही देश में विनाशकारी कार्यों के लिए किया जाता है।इसके अंतर्गत दिखाने के लिए बड़े बड़े दावे किए तो जाते हैं,लेकिन भीतर ही भीतर उसके अंतर्गत जो काम किये जाते हैं वह इस देश को रसातल में पहुंचा देनेवाला होता है।इन्हीं कानूनों में एक कानून है एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) । यह भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक कानून है, जो विदेशों से आने वाले पैसों (विदेशी अंशदान) को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन भारत की आंतरिक सुरक्षा, संप्रभुता या सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित न करे। पंजीकृत गैर-सरकारी संगठनों (NGO), धर्मार्थ संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थाओं को FCRA से प्राप्त फंड का उपयोग केवल निम्नलिखित अनुमोदित सामाजिक कार्यों के लिए करने की अनुमति है:
सामाजिक और आर्थिक विकास: इसके अंतर्गत गरीबों, आदिवासियों और जरूरतमंदों की भलाई के लिए किए जाने वाले कार्य आते हैं।शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाएं: इसके अंतर्गत स्कूल, कॉलेज, पुस्तकालय, और अस्पताल खोलना आदि कार्य आते हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक कार्य: इसके अंतर्गत विशिष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक स्थलों के रख-रखाव के लिए (धर्मांतरण को छोड़कर)आदि कार्य आते हैं।
इन फंड्स के दुरुपयोग किए जाने की बात करें तो गृह मंत्रालय की रिपोर्टों और जांच में विदेशी चंदे के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें निम्ननिखित प्रमुख है:- धर्मांतरण (Religious Conversion): इसके अंतर्गत सामाजिक कार्य या राहत सामग्री के नाम पर विदेशी फंड प्राप्त कर उसका उपयोग गरीब व आदिवासी इलाकों में लोगों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए किया जाता है।
गैर-कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां: इसके अंतर्गत विदेशी फंड प्राप्त कर उसका दुरूपयोग भारत विरोधी प्रचार, सांप्रदायिक दंगों को भड़काने या देश की नीतियों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों/आंदोलनों को फंड बुपलब्ध करने में किया जाता है।
मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद: इसके अंतर्गत विदेशी धन का उपयोग हवाला के जरिए आतंकवादी गतिविधियों या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता है।
सब-ग्रांटिंग (Sub-granting): इसके अंतर्गत बड़ी संस्थाओं द्वारा विदेशी फंड को बिना अनुमति के अन्य छोटी या स्थानीय संस्थाओं में बांटा जाता है, जिससे पैसे के अंतिम उपयोग का पता नहीं चलता है।
FCRA से प्राप्त धन राशि के
दुरुपयोग को रोकने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने कमर कस लिया है।इन दुरुपयोगों को रोकने के लिए, भारत सरकार ने FCRA नियमों में निम्नलिखित कड़े संशोधन किए हैं:
विशिष्ट उपयोग: इसके अंतर्गत अब संस्थाओं को पहले से तय करना होता है कि वे फंड का उपयोग किस श्रेणी (जैसे- शैक्षणिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक) में करेंगे और उसी के अनुसार खर्च करना होगा।भौगोलिक दायरा (Geo-tagging): संस्थाओं को बताना होता है कि वे किस राज्य या जिले में पैसा खर्च कर रही हैं।
पारदर्शिता: विदेशी फंड केवल नई दिल्ली स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा के विशेष खाते में ही आ सकता है। इसके अलावा, फंड के अंतिम स्रोत (Original Donor) तक की पूरी जानकारी और सोशल मीडिया हैंडल की डिटेल गृह मंत्रालय को देनी अनिवार्य है।

