अकाल तख्त के फैसले का आम आदमी पार्टी की राजनीति पर पड़ेगा बड़ा असर

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को व्यक्तिगत रूप से श्री अकाल तख्त साहिब के सामने नहीं बुलाया गया था। अकाल तख्त ने विवादित बयानों और बेअदबी कानून से जुड़े मामलों में आप सरकार के मंत्रियों और विधायकों को तलब किया था।

इसे लेकर भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत रूप से तलब न होने के बावजूद, अकाल तख्त की सर्वोच्चता का सम्मान करते हुए उनकी पार्टी के सभी सिख मंत्री और विधायक अपना लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए थे। इससे पहले जनवरी महीने में सीएम भगवंत मान खुद अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रख चुके थे।

गौरतलब है कि एक कथित आपत्तिजनक वायरल वीडियो और झूठ बोलने के मामले में अकाल तख्त ने जांच (फॉरेंसिक रिपोर्ट) के आधार पर सीएम भगवंत मान को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया था।
अकाल तख्त के जत्थेदार द्वारा सिख समुदाय को यह निर्देश दिया गया कि वे मान से ‘अपना संबंध तोड़ लें।अकाल तख्त ने सभी तलब किए गए आप नेताओं को एक धार्मिक दंड (तनखाह) के रूप में श्री अकाल तख्त साहिब में ‘सेवा’ करने और अपने आचरण के लिए पश्चाताप करने का आदेश दिया।आप पार्टी के नेताओं ने अकाल तख्त के फैसलों और निर्देशों को पूरी श्रद्धा से स्वीकार करने की बात कही है।

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