पटना: पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) से जुड़े विवाद में बिहार स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को विस्तृत तथ्यात्मक प्रतिवेदन जारी करते हुए अधिसूचित प्राध्यापक डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों को तथ्यों के विपरीत बताया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाएगी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य मंत्री के कार्यक्रम की पहले ही दे दी गई थी सूचना
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि 23 जून को स्वास्थ्य मंत्री के PMCH कार्यक्रम की उन्हें पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। जबकि विभाग का दावा है कि 22 जून की शाम करीब 7 बजे ही तत्कालीन अधीक्षक ने मोबाइल पर उनसे बातचीत कर कार्यक्रम की पूरी जानकारी दे दी थी। साथ ही यह भी बताया गया था कि स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत अधीक्षक करेंगे और धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य देंगे, जिस पर डॉ. सिंह ने सहमति भी जताई थी।
छुट्टी की सूचना पर भी विभाग ने उठाए सवाल
प्रतिवेदन में कहा गया है कि डॉ. सिंह ने अपने पुत्र के माध्यम से व्हाट्सएप पर अवकाश की सूचना भेजने की बात कही थी, जबकि विभाग का दावा है कि जलने की सूचना कार्यक्रम समाप्त होने के कई घंटे बाद भेजी गई। विभाग के अनुसार इससे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि मीडिया में मामला सामने आने के बाद अपने बचाव में व्हाट्सएप संदेश भेजा गया।
निजी क्लिनिक में मौजूद होने का दावा
स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि डॉ. सिंह की अनुपस्थिति की शिकायत मिलने के बाद पहले एक छद्म मरीज भेजा गया, जिसके बाद विभागीय स्तर और जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई गई। जांच के दौरान उनके निजी क्लिनिक के बाहर सरकारी वाहन खड़ा मिला। विभाग का कहना है कि क्लिनिक से निकल रहे मरीजों ने बताया कि वे डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह से इलाज कराकर निकले हैं।
प्रतिवेदन के अनुसार क्लिनिक में मौजूद कंपाउंडर ने भी बताया कि डॉक्टर सुबह, दोपहर और शाम के निर्धारित समय पर मरीज देखते हैं। विभाग ने इसे कार्यालय अवधि में निजी प्रैक्टिस किए जाने का संकेत बताया है।
प्रशासनिक आधार पर किया गया स्थानांतरण
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया कार्यों के प्रति लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अनधिकृत अनुपस्थिति के आरोपों के आधार पर डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह को प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में मनोरोग विभाग के प्राध्यापक के रूप में पदस्थापित किया गया है। विभाग ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से किया गया स्थानांतरण है, इसे दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी विभाग की आपत्ति
विभाग ने कहा कि डॉ. सिंह ने अनधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में विभाग को कोई अभ्यावेदन देने के बजाय सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों के प्रतिकूल है।
उच्चस्तरीय जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति से उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाएगी। समिति डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह का पक्ष भी सुनेगी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करेगी। विभाग ने दोहराया कि कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी।

