TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। पार्टी के बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात कर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग रखी। इस मुलाकात के बाद बागी खेमे ने दावा किया कि उन्होंने एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी’ में विलय कर लिया है।
बागी नेताओं का कहना है कि उनके राजनीतिक भविष्य और पार्टी की वास्तविक पहचान को लेकर अंतिम फैसला अदालत में होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में उनके गुट की ताकत और बढ़ सकती है।
स्पीकर से मुलाकात के बाद क्या बोले बागी सांसद?
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसदों की ओर से कहा गया कि उनका गुट अब एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी के साथ जुड़ चुका है। उनका मानना है कि तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक स्थिति और नेतृत्व से जुड़े विवादों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से तय होगा। बागी सांसदों ने संसद में अपनी अलग राजनीतिक पहचान के अनुरूप व्यवस्था की मांग भी रखी है।
भूपेंद्र यादव से भी हुई मुलाकात
स्पीकर से मिलने से पहले बागी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की। इस दौरान कई प्रमुख सांसद मौजूद रहे। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
बागी खेमे की ओर से यह दावा भी किया गया कि जल्द ही दो और सांसद उनके साथ आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो लोकसभा में इस समूह की संख्या और मजबूत हो जाएगी।
नई पार्टी में विलय के बाद बदल सकते हैं समीकरण
बागी सांसदों ने जिस ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी’ में शामिल होने का फैसला किया है, उसका फोकस मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों पर बताया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बागी नेताओं को संसदीय मान्यता और दलबदल संबंधी कानूनी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। साथ ही भविष्य में यह गुट केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए सरकार को समर्थन देने की स्थिति में भी आ सकता है।
ममता बनर्जी के आवास पर भी हुई गतिविधियां
इधर कोलकाता में भी राजनीतिक हलचल तेज रही। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर पैदा हुए संकट और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हुई।
सागरिका घोष ने उठाए कानूनी सवाल
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बागी नेताओं के कदम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दलबदल विरोधी कानून का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी सांसद या विधायक के लिए सदन के भीतर अलग गुट बनाकर कार्य करना आसान नहीं है, यदि वह मूल पार्टी के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुआ हो।
उनका कहना है कि कानून के तहत केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में राजनीतिक दलों के विलय को मान्यता मिलती है। ऐसे मामलों में निर्धारित संवैधानिक और कानूनी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है।
दलबदल कानून पर बढ़ी बहस
सागरिका घोष ने यह भी कहा कि किसी सांसद या विधायक को अपनी सदस्यता बनाए रखने के लिए दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल पार्टी से अलग होकर सदन में स्वतंत्र गुट के रूप में काम करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद से लेकर अदालत तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
क्या होगा आगे?
टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों और बागी सांसदों के नए राजनीतिक कदम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अदालत, चुनाव आयोग और संसद की प्रक्रियाएं इस विवाद को किस दिशा में ले जाती हैं।
फिलहाल इतना तय है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर शुरू हुआ यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा असर डाल सकता है।

