पटना: राजधानी पटना स्थित बापू टावर में संग्रहालयों की बदलती भूमिका और समकालीन समाज में उनकी प्रासंगिकता पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। ‘प्रश्न के रूप में म्यूजियम’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश की प्रतिष्ठित संग्रहालयविद और कॉन्फ्लिक्टोरियम म्यूजियम की संस्थापक सुश्री अवनी सेठी ने अपने विचार और अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. इम्तियाज अहमद ने की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षाविद, इतिहास प्रेमी, बुद्धिजीवी और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
म्यूजियम केवल वस्तुओं का संग्रह नहीं, संवाद का मंच भी

अपने व्याख्यान में अवनी सेठी ने संग्रहालयों की पारंपरिक अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि आधुनिक समय में म्यूजियम की भूमिका केवल ऐतिहासिक वस्तुओं को संरक्षित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संग्रहालयों को समाज के समकालीन सवालों, चुनौतियों और संवेदनशील विषयों पर संवाद का सक्रिय मंच बनना होगा।
उन्होंने अहमदाबाद और रायपुर में स्थापित ‘कॉन्फ्लिक्टोरियम’ म्यूजियम के अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार संग्रहालय समाज के विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श और समझ विकसित करने का माध्यम बन सकते हैं।
बापू टावर की तकनीकी प्रस्तुति की सराहना
अवनी सेठी ने बापू टावर का अवलोकन करने के बाद इसकी भव्यता और आधुनिक प्रस्तुति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों और जीवन दर्शन को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक है।
इतिहासकार इम्तियाज अहमद ने बताया ज्ञानवर्धक व्याख्यान
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इम्तियाज अहमद ने कहा कि यह व्याख्यान संग्रहालयों के प्रति लोगों की पारंपरिक सोच को नया दृष्टिकोण प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि अवनी सेठी के विचारों से संग्रहालयों की भूमिका और संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।

भविष्य में भी होंगे ऐसे बौद्धिक कार्यक्रम
बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने कहा कि संग्रहालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के विविध आयामों को लोगों तक पहुंचाने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के व्याख्यान और बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में ज्ञान और संवाद की संस्कृति को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन बापू टावर के उपनिदेशक ललित कुमार सिंह ने किया, जबकि अंत में प्रशाखा पदाधिकारी प्रत्यूष चंद्र मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

