कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। एक ओर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ने पूछताछ के लिए तीसरा नोटिस जारी किया है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
कालीघाट स्थित कार्यालय पहुंची CID टीम
मंगलवार को सीआईडी की एक टीम कोलकाता के कालीघाट इलाके स्थित कार्यालय पहुंची। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव में कथित हस्ताक्षर विसंगतियों की जांच के सिलसिले में की गई। जांच एजेंसी इस मामले में विभिन्न तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
अभिषेक बनर्जी को फिर भेजा गया नोटिस
सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को तीसरा नोटिस जारी करते हुए उन्हें दक्षिण कोलकाता स्थित मुख्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा है। इससे पहले भी उन्हें दो बार नोटिस भेजा जा चुका था।
जानकारी के अनुसार, पहले नोटिस के बाद अभिषेक बनर्जी ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की थी। बाद में जारी दूसरे नोटिस पर भी उन्होंने पूछताछ में शामिल होने के लिए और समय मांगा। अब एजेंसी ने उन्हें पुनः उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
हस्ताक्षर विवाद मामले की हो रही जांच
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला विधानसभा में विपक्ष से जुड़े कुछ अहम पदों पर नियुक्ति के प्रस्ताव में कथित हस्ताक्षर संबंधी असंगतियों की जांच से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां दस्तावेजों और संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।
पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता गिरफ्तार
इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को उत्तर 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ जबरन वसूली और आपराधिक धमकी देने से संबंधित आरोपों की जांच चल रही है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनसे कई वर्ष पहले बड़ी रकम की मांग की गई थी। मामले में कार्रवाई करते हुए अदालत ने दत्ता को आठ दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
सुजीत बोस की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
सब्यसाची दत्ता की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके सुजीत बोस को भी एक कथित भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इन मामलों को राजनीतिक दृष्टि से भी देख रही है।

