पटना: गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार में 9 जून को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) की 10वीं वर्षगांठ विशेष रूप से मनाई जाएगी। इस अवसर पर पूरे राज्य में जागरूकता कार्यक्रमों और स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
इस वर्ष अभियान की थीम “प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष: सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत” रखी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सिविल सर्जनों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि कार्यक्रम का सफल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
77 लाख से अधिक महिलाओं को मिला अभियान का लाभ
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून 2016 से अप्रैल 2026 तक बिहार में 77 लाख 05 हजार 820 गर्भवती महिलाएं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से लाभान्वित हो चुकी हैं। वर्तमान में राज्य के 1,277 स्वास्थ्य संस्थानों में यह कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में इस अभियान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। समय पर जांच और जोखिम की पहचान से गर्भवती महिलाओं को बेहतर उपचार और आवश्यक चिकित्सीय सहायता उपलब्ध हो रही है।
पहली तिमाही की गर्भवतियों के लिए विशेष व्यवस्था
10वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्य के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पहली तिमाही की गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में प्रसव पूर्व जांच (ANC Check-up) सुनिश्चित की जाएगी ताकि शुरुआती चरण में ही स्वास्थ्य संबंधी संभावित जोखिमों की पहचान की जा सके।
वहीं दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में आवश्यक जांच और परामर्श उपलब्ध कराने के लिए अनुमंडलीय अस्पतालों, जिला अस्पतालों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) में विशेष व्यवस्था की जाएगी।
उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों पर रहेगा विशेष फोकस
स्वास्थ्य विभाग ने एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान और निगरानी को प्राथमिकता दी है। ऐसी महिलाओं की प्रसव के बाद 45 दिनों तक नियमित मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग की जाएगी ताकि मां और नवजात दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सके।
प्रसव पूर्व जांच में बिहार ने दर्ज की बड़ी प्रगति
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
सर्वे के अनुसार गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रसव पूर्व जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं चार या उससे अधिक प्रसव पूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की वजह से गर्भावस्था के दौरान जोखिमों की समय पर पहचान संभव हो रही है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिल रही है।
मातृ स्वास्थ्य को लेकर सरकार की प्राथमिकता
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सुरक्षित मातृत्व केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और सशक्त भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने का लक्ष्य लगातार आगे बढ़ रहा है।
9 जून को आयोजित होने वाला विशेष अभियान राज्यभर की गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

