आजकल लगभग हर स्मार्टफोन और लैपटॉप यूजर रोजाना स्क्रीनशॉट लेते हैं। कभी फोटो सेव करने के लिए, कभी पेमेंट रसीद, चैट या सोशल मीडिया पोस्ट संभालकर रखने के लिए।लेकिन कई बार लोग नोटिस करते हैं कि स्क्रीनशॉट लेने के बाद फोटो की क्वालिटी पहले जैसी नहीं रहती, खासकर जब उसे जूम किया जाए या बार-बार शेयर किया जाए। असल में इसका कारण फोन या लैपटॉप की स्क्रीन रेजोल्यूशन, इमेज कंप्रेशन और स्क्रीन कैप्चर करने का तरीका होता है, न कि ओरिजिनल फोटो की क्वालिटी।
स्क्रीनशॉट लेने के बाद फोटो की क्वालिटी खराब होने की सबसे बड़ी वजह होती है रिजॉल्यूशन का कम हो जाना। आसान शब्दों में समझें तो मान लीजिए आपने एक हाई-क्वालिटी 4K फोटो डाउनलोड की, लेकिन उसे मोबाइल की छोटी स्क्रीन पर देखा।अब जब आप उसका स्क्रीनशॉट लेते हैं, तो फोन असली फोटो नहीं बल्कि स्क्रीन पर दिख रही उसी लिमिटेड क्वालिटी वाली इमेज को कैप्चर करता है।
यही कारण है कि बाद में फोटो को जूम करने पर डिटेल्स धुंधली, पिक्सलेटेड या ब्लरी दिखने लगती हैं। कई सोशल मीडिया ऐप्स पहले से ही फोटो को कंप्रेस करके दिखाती हैं। इसलिए स्क्रीनशॉट में वही कंप्रेस्ड वर्जन सेव होता है।
इसके अलावा एक और वजह है फाइल कंप्रेशन।ज्यादातर फोन स्क्रीनशॉट को PNG या JPEG फॉर्मेट में सेव करते हैं, और कई ऐप्स इन्हें शेयरिंग के दौरान और ज्यादा कंप्रेस कर देती हैं।बार-बार शेयर करने पर क्वालिटी में फर्क और साफ नजर आने लगता है।
शेयर करने के बाद फोटो की हालत और खराब हो जाती है।
आपने नोटिस किया होगा कि WhatsApp या सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट भेजने के बाद उसकी क्वालिटी अचानक खराब हो जाती है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर ऐप्स फोटो और स्क्रीनशॉट का साइज अपने आप छोटा कर देते हैं, ताकि फाइल जल्दी अपलोड हो जाए और कम इंटरनेट डेटा खर्च हो।
लेकिन इसका असर सीधे इमेज की क्वालिटी पर पड़ता है। स्क्रीनशॉट में लिखा टेक्स्ट धुंधला दिखने लगता है, फोटो की डिटेल गायब हो जाती है और ग्राफिक्स भी पहले जितने शार्प नहीं दिखते।ये सिर्फ देखने भर की समस्या नहीं है। कई बार पेमेंट रिसीट पढ़ना मुश्किल हो जाता है, जरूरी डॉक्युमेंट्स की जानकारी साफ नजर नहीं आती या फिर ऑफिस प्रेजेंटेशन में स्क्रीनशॉट प्रोफेशनल नहीं लगते।

