, मोबाइल टावरों में स्वदेशी तकनीक फिट करने वाला दुनिया का चौथा देश बना भारत

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BSNL की 4G सेवाएं लॉन्च होने से सरकारी कंपनी को बड़ा अपग्रेड मिला है। सरकार ने पिछले साल बीएसएनएल 4G को लॉन्च किया था और अब इसे नेक्स्ट लेवल पर ले जाने की तैयारी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल टावरों में स्वदेशी तकनीक फिट करके लोगों को टेलिकॉम सेवाएं देने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है भारत। केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी (Chandra Sekhar Pemmasani) ने कहा है कि भारत दुनिया का चौथा देश है जिसने खुद के टेलीकॉम रेडियो नेटवर्क इक्विपमेंट डेवलप किए हैं। हालांकि अभी भी बीएसएनएल को मोबाइल टावरों की जरूरत है।

ईटी टेलिकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, टेलिकॉम इक्विपमेंट मार्केट में अभी एरिक्सन, नोकिया समेत चीन की हुवावे और जेडटीई का जलवा है। लेकिन भारत की टीसीएस, तेजस नेटवर्क्स और सरकारी संस्था C-DoT ने मिलकर जिस तरह से देश में बीएसएनएल 4जी को पहुंचाया है, उसने भारत को आत्मनिर्भर बनने की ओर आगे बढ़ा दिया है।
TCS, तेजस नेटवर्क्स और सी-डॉट ने देश में बीएसएनएल के लिए 1 लाख 4G साइट्स लगाई हैं।

तेजस नेटवर्क्स ने जापान की NEC और Rakuten के साथ भी साझेदारी की है।
तेजस नेटवर्क्स का मकसद स्वदेशी तकनीक को विदेशों तक पहुंचाना है और वह ग्लोबल कंपनियों से बात कर रही है।

BSNL के सामने अपने नेटवर्क को अपग्रेड करने के साथ-साथ उसे स्केल यानी आगे ले जाने की चुनौती थी। कंपनी ने इन चुनौतियों का सामना किया। बीएसएनएल ने स्वदेशी कंपनियों के साथ मिलकर इन समस्याओं को दूर कर लिया। रिपोर्ट के अनुसार, 1 लाख 4जी साइटों के बाद टीसीएस को 23 हजार और साइटों का ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। यानी यह नेटवर्क अभी विस्तृत होगा और अधिक से अधिक लोगों तक बीएसएनएल को पहुंचाया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, बीएसएनएल टावरों में लगी करीब 50 हजार बैटरियां, पावर प्लांट और पुरानी केबल्स को बदला गया है, जिससे नेटवर्क कनेक्टिविटी और बेहतर हुई है।

तमाम उपलब्धियों के बावजूद बीएसएनएल की 5जी सेवाओं का राेलआउट अबतक देश में नहीं हो पाया है। BSNL के अन्य कॉम्पिटिटर्स जैसे- जियो, एयरटेल और वोडा-आइडिया की 5जी सर्विस देश में लंबे समय से चल रही है। बीएसएनएल को टावरों के साथ-साथ हाईस्पीड इंटरनेट सेवाओं को रोलआउट करने की सख्त जरूरत नजर आती है।

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