डेमोक्रेसी, रूल ऑफ लॉ बनाते हैं नैचुरल पार्टनर,नॉर्डिक देशों के नेताओं के बैठक में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ बात के बाद कहा कि लोकतंत्र, कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ) और बहुपक्षवाद (मल्टीलेटरलिज्म) के प्रति साझा प्रतिबद्धता भारत और नॉर्डिक देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाती है।उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी जैसी साझा प्राथमिकताएं दोनों पक्षों के संबंधों को नए अवसरों में बदल रही हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2025 से नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य ईएफटीए (EFTA) देशों के साथ ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट लागू किया गया है, जिससे आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिली है।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत और यूरोपीय देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी हुआ है, जिसमें डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन जैसे देश भी भागीदार हैं। यह समझौता व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।पीएम मोदी ने आगे कहा कि इन महत्वाकांक्षी ट्रेड एग्रीमेंट्स के माध्यम से भारत और नॉर्डिक देशों के संबंधों में एक नए “स्वर्णिम युग” की शुरुआत होने जा रही है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में भारत और नॉर्डिक देश मिलकर नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था (rules-based global order) को और मजबूत करते रहेंगे।प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे यूक्रेन का मुद्दा हो या पश्चिम एशिया की स्थिति, भारत शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए संघर्ष के शीघ्र समाधान के प्रयासों का लगातार समर्थन करता रहेगा।

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने मंगलवार को आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग बैठकों में स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार, सतत विकास और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। ये बैठकें भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित की गईं।

आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रन फ्रॉस्टडॉटिर के साथ बातचीत में मोदी ने दोनों देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा, मत्स्य पालन, भू-तापीय ऊर्जा, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।उन्होंने “ब्लू इकोनॉमी” में आइसलैंड की क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत-ईएफटीए समझौता व्यापार और निवेश को गति देगा।

फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ बैठक में व्यापार, निवेश, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 5G-6G, क्वांटम टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा और सर्कुलर इकोनॉमी में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। साथ ही नवाचार, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ बातचीत में भी द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

ओस्लो में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन सहित सभी नॉर्डिक देशों के नेता शामिल हुए। यह शिखर सम्मेलन 2018 (स्टॉकहोम) और 2022 (कोपेनहेगन) में हुए पिछले सम्मेलनों की निरंतरता है और इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, सतत विकास, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, अंतरिक्ष और आर्कटिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और रणनीतिक रूप देना है।

नॉर्डिक देश उत्तरी यूरोप और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में स्थित हैं और उनकी संयुक्त अर्थव्यवस्था 1.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। ये देश नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास के वैश्विक मानकों में अग्रणी माने जाते हैं।

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