14 मई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट का एक फैसला आया।इस फैसला के बाद रावण वाड्रा की मुश्किलें तो बढ़ ही गई है, प्रियंका गांधी वाड्रा भी परेशानी में घिर गई हैं और राहुल गांधी का सोनिया गांधी की बैचेनी भी बढ़ गई है।14 मई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट का जो फैसला आया है ,उससे सीधे -सीधे तो राबर्ट वाड्रा का कुछ भला बुरा नहीं होने वाला है,लेकिन इसके आधार पर दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट से ऐसा फैसला आ सकता है,जो इन सबको दहला सकता है। राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला रॉबर्ट वाड्रा को जेल की सलाखों के अंदर तक पहुंचा सकता है । रॉबर्ट वाद्र प्रियंका गांधी राहुल गांधी और सोनिया गांधी मुश्किल में इसलिए हैं क्योंकि इस समय देश में उनके नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार नहीं चल रही ऐसे में इनके लिए अपने प्रभाव का उपयोग कर रॉबर्ट वाड्रा की जेल से संभावित गिरफ्तारी को टालने के लिए कुछ कर पाना संभव नज़र वह नहीं आ रहा है। ऐसे में राउज एवेन्यू कोर्ट के किसी फैसले से रॉबर्ट वाड्रा को कहीं जेल ना हो जाए, यही बात प्रियंका गांधी राहुल गांधी और सोनिया गांधी को परेशान कर रहा है।14 मई को दिल्ली हाई कोर्ट में शिकोहपुर ज़मीन सौदे (गुरुग्राम) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई चल रही थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 मई को शिकोहपुर ज़मीन सौदे (गुरुग्राम) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा को कोई बड़ी राहत नहीं दी। हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा जारी समन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े इस मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट में निम्न बिंदुओं पर जोर दिया गया।
ईडी का दावा: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि वाड्रा ने अपनी याचिका में गलत तथ्य पेश किए हैं।
मामला: यह मामला 2008 में गुरुग्राम में 3.5 एकड़ ज़मीन के कथित अवैध हस्तांतरण और हेराफेरी से जुड़ा है।
अगली कार्रवाई: ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लिया है, और अब वाड्रा को 16 मई को मामले की अगली सुनवाई में पेश होना है।
दिल्ली हाई कोर्ट से इस प्रकार के फैसला आने के बाद अब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट सक्रिय हो गई है।दिल्ली के राउस एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर संज्ञान लिया है और उन्हें 16 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया है।14 मई 2026 की जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम के शिकोहपुर में 3.5 एकड़ जमीन के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
इस मामले में अभी तक की मुख्य बातेंनिम्नलिखित है।
कोर्ट का संज्ञान और समन: विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा की अदालत ने ED के दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री है।
ED के आरोप: ED ने आरोप लगाया है कि वाड्रा ने स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से 2008 में ₹7.5 करोड़ में जमीन खरीदी और 4 साल में 700% के मुनाफे (करीब 58 करोड़ रुपये) के साथ डीएलएफ को बेच दी।
अचल संपत्ति जब्ती: जुलाई 2025 में ED ने वाड्रा और उनकी कंपनियों से जुड़ी लगभग 37-38 करोड़ रुपये से अधिक की 43 अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से जब्त (Attach) किया था।
हाईकोर्ट से झटका: वाड्रा ने ट्रायल कोर्ट के समन को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 14 मई 2026 को हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए ED की दलीलों पर सुनवाई जारी रखने को कहा है।
वाड्रा का पक्ष: रॉबर्ट वाड्रा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित (Political Vendetta) बताया है।
रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े इस मामले में हाई कोर्ट के 14 में के फैसले और इसके बाद राहुल एवेन्यू कोर्ट की सक्रिय हो जाने के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा को जेल की सजा हो सकती है? चार्जशीट पर संज्ञान लिए जाने का मतलब है कि कोर्ट ने मामला गंभीर माना है। 16 मई को पेशी के बाद कोर्ट तय करेगा कि आगे की कार्यवाही क्या होगी।
वैसे भारत में मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जो प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत आता है। इसमें दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 साल से लेकर 7 साल तक की सश्रम कारावास की सजा हो सकती है। यदि मामला मादक पदार्थ (NDPS Act) से संबंधित है, तो यह सजा 10 साल तक बढ़ सकती है।

