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अब 125 दिन काम, ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
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प्रभावी मनरेगा अधिनियम का स्थान लेगा नया कानून
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समयसीमा में कार्य न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते का है प्रावधान
Bihar News: बिहार समेत देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत- रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी रामजी) अधिनियम 2025 लागू कर दिया जाएगा। पहले से चल रही मनरेगा योजना को नए रूप से परिवर्तित कर इस योजना की शुरुआत की जा रही है। इसके बाद काम के इच्छुक मजदूर 125 दिनों के रोजगार के लिए आवेदन कर सकेंगे। योजना में श्रमिकों को मजदूरी मांगने की दिशा में पहली बार ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी गई है। श्रमिक एप के माध्यम से घर बैठे योजना में निर्धारित रोजगार की मांग कर सकते हैं।
मनरेगा आयुक्त अभिलाषा कुमारी शर्मा ने बताया कि विकसित भारत- जी राम जी अधिनियम वर्तमान में प्रभावी मनरेगा अधिनियम का स्थान लेगा। अधिनियम में आजीविका सुरक्षा, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण, प्रौद्योगिकी सक्षम प्रशासन, अभिसरण आधारित योजना एवं जलवायु अनुकूलता पर विशेष जोर दिया गया है। अधिनियम के तहत अकुशल श्रम कार्य के इच्छुक ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों की रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इस बढ़ी हुई गारंटी का उद्देश्य ग्रामीण विकास की तीव्र गति को समर्थन देना, अधिक आय सुरक्षा प्रदान करना एवं विस्तारित रोजगार अवसरों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाना है।
उन्होंने कहा कि अकुशल श्रम कार्य के इच्छुक ग्रामीण, मौखिक, लिखित आवेदन के साथ-साथ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी रोजगार की मांग कर सकेंगे। उन्हें निर्धारित समय-सीमा में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। तय समयसीमा के भीतर कार्य न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते के भुगतान का भी प्रावधान किया गया है। मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में किया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
मनरेगा आयुक्त ने बताया कि वीबी-जी राम जी अधिनियम के अंतर्गत जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क निर्माण, आजीविका संवर्धन, कृषि आधारित कार्य, पशुपालन, मत्स्य पालन, जलवायु अनुकूल विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे रोजगार के अवसर में वृद्धि होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस अधिनियम में मजबूत सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था की गई है, जिससे सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा और योजना के कार्यान्वयन में बेहतर पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।

