Bihar News:राज्य को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए 23 अप्रैल तक चलेगा पोषण पखवाड़ा

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Bihar News: बिहार को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ राज्यभर में पोषण पखवाड़ा 2026 जोर-शोर से मनाया जा रहा है। 9 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 23 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें इस बार खास तौर पर बच्चों के शुरुआती छह वर्षों में मस्तिष्क विकास पर फोकस किया गया है। समाज कल्याण विभाग के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान ने पूरे राज्य में एक जन आंदोलन का रूप ले लिया है।

38 जिलों में मेगा अभियान, लाखों गतिविधियां आयोजित

राज्य के सभी 38 जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए पोषण पखवाड़ा व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। अब तक 64 लाख से अधिक जन-जागरूकता गतिविधियां दर्ज की जा चुकी हैं, जिसमें पोषण पंचायत, रैलियां, स्वास्थ्य शिविर और पोषण प्रदर्शनियां शामिल हैं।

इस अभियान की नियमित मॉनिटरिंग विभाग की उच्चस्तरीय टीम द्वारा की जा रही है, ताकि इसका असर हर गांव और हर परिवार तक पहुंचे।

बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार, कुपोषण की हो रही पहचान

अभियान के दौरान 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को टेक-होम राशन के रूप में चावल, दाल और सोयाबड़ी दी जा रही है। वहीं 3 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म पका हुआ पौष्टिक भोजन जैसे खिचड़ी और पुलाव उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसके साथ ही कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए सैम-मैम स्क्रीनिंग, वजन और लंबाई की माप तथा एनीमिया जांच भी की जा रही है। जरूरतमंद बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर इलाज और विशेष देखभाल दी जा रही है।

अब सिर्फ मां नहीं, पिता भी निभाएंगे जिम्मेदारी

इस बार के पोषण पखवाड़ा की सबसे खास बात है पुरुषों की भागीदारी पर जोर। सरकार ने साफ किया है कि बच्चों का पोषण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर पिताओं के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें उन्हें बच्चों के पोषण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, स्क्रीन टाइम कम करने और बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

पहले 6 साल सबसे अहम, 85% ब्रेन डेवलपमेंट इसी समय

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास छह साल की उम्र तक हो जाता है। खासकर पहले 1000 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान सही पोषण, देखभाल और खेल आधारित शिक्षा बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की मजबूत नींव रखते हैं।

कुपोषण के खिलाफ जंग, बदल रही सोच और व्यवहार

बिहार में अभी भी कुपोषण, स्टंटिंग, वेस्टिंग और एनीमिया जैसी समस्याएं चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में पोषण पखवाड़ा जागरूकता बढ़ाने, परिवार और समुदाय को जोड़ने और व्यवहार में बदलाव लाने का बड़ा माध्यम बन रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि इस अभियान के जरिए हर बच्चे को बेहतर पोषण, हर मां को सही जानकारी और हर परिवार को स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।

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