बिहार का अगला मुख्यमंत्री जेडीयू और बीजेपी दोनों बैक ग्राउंड का होगा

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#next Chief Minister of Bihar# both JDU and BJP background.

राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद जब उन्हें विधान परिषद से इस्तीफा देने की बात आई तो उन्होंने अंतिम दिन तक इंतजार किया और तब कहीं जाकर इस्तीफ़ा देकर विधान परिषद की सदस्यता का त्याग किया। इसके बाद राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी उन्होंने सदस्यता तब ली जबकि राज्यसभा के सभापति ने राज्यसभा में इसकी पृष्ठभूमि तैयार कर दी। लेकिन मुख्यमंत्री के पद से उन्होंने अभी भी इस्तीफा नहीं दिया है।

इन दिनों बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू के संदर्भ में खरमास जैसी एक बड़ी बात कही जा रही। नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा की सदस्यता चंद्रमा आधारित पंचांग के हिसाब से खरमास की समाप्ति के बाद लिया। और बीजेपी अपने खेमे से बिहार का मुख्यमंत्री की घोषणा करने के लिए सौर पंचांग पर आधारित खरमास की समाप्ति जो 14 अप्रैल को समाप्त होगा ,तक इंतजार कर रही।

दरअसल यह खरमास जैसा मुद्दा इसलिए सामने आया है, क्योंकि इस समय जेडीयू और बीजेपी ही एक दूसरे के लिए खर यानी बैरी बने हुए हैं। ना तो जेडीयू बीजेपी को स्वतंत्र रूप से बिहार का अपना मुख्यमंत्री चुनने दे रही है और न बीजेपी आगामी मंत्रिमंडल में जेडीयू को कोई बड़ा भाव देना चाह रही है। और यह काम कोई आसानी से होने वाला नहीं है। इसलिए खरमास के बहाने बीजेपी और जेडीयू दोनों टाइम ले रहे हैं और एक दूसरे पर दबाव बना रहे हैं।

बीजेपी द्वारा बिहार में अगले मुख्यमंत्री के चयन और उसके मंत्रिमंडल में जेडीयू की बेहतर पकड़ बनाने के लिए जो कुछ प्रयास चल रहा है, उसके अंतर्गत जेडीयू की तरफ से अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का पोस्टर लगाकर उन्हें बिहार का अगला मुख्यमंत्री और नीतीश कुमार का असली उत्तराधिकारी बताकर बीजेपी पर हमला किया जा रहा है। निशांत कुमार के इस पोस्ट में लिखा गया है बिहार में ना तो बुलडोजर बवाल चाहिए और ना ही फिर से दंगा फसाद चाहिए। इसके अलावा इसमें आगे लिखा गया है कि है लोकनाथ अब आपकी परछाई स्वरूप युवा जन सेवक निशांत कुमार चाहिए वहीं इसके अंत में लिखा गया है कि नीतीश जी का मिशन अधूरा निशांत कुमार ही करेंगे पूरा।

नीतीश कुमार के इस नए अंदाज से बीजेपी भी अंदर ही अंदर डरी हुई है। बीजेपी इस बात को अच्छी तरह से जानती है कि नीतीश कुमार किसी भी वक्त कोई बड़ा खेला कर सकते हैं। और नीतीश कुमार ने कोई बड़ा खेल कर दिया तो फिर बीजेपी को जो एक उम्मीद जगी है, बिहार में पहली दफा अपने पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की, वह भी समाप्त हो जाएगी और नीतीश कुमार विक्टिम कार्ड खेलकर बीजेपी को बदनाम कर उसके वोट बैंक में भी सेंध लगा देंगे। लिहाजा बीजेपी भी बड़ी फूंक कर कदम रख रही है। बीजेपी बार-बार सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार के पास भेज रही है और उन्हें मनाने का प्रयास कर रही है कि वह इस बार कम से कम कोई बड़ा खेला ना कर दें।

बीजेपी और जेडीयू के बीच चल रहे इस शक्ति परीक्षण में अब लगता है कि दोनों पार्टियों ने कम से कम कोई फार्मूला तो जरूर तय कर लिया है, जिसके आधार पर बिहार के आगामी मुख्यमंत्री का चेहरा भी तय होगा और मंत्रिमंडल भी। तभी तो केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जिन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री चार बार बनने का अनुभव है, बीजेपी उन्हें बिहार में बीजेपी के खेमा से नीतीश कुमार की सहमती लेते हुए मुख्यमंत्री के चेहरे पर आम सहमति बनाने के लिए बिहार भेज रही है ताकि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी घोषणा करने के लिए बिहार आए तो उनके समक्ष कसम कस वाली कोई स्थिति सामने नहीं आए।

हालांकि इस बात का खुलासा ना तो बीजेपी के तरफ से किया जा रहा है और न हीं जेडीयू के तरफ से। लेकिन जिस प्रकार से चर्चा में चल रहे कई नाम अचानक चर्चा से बाहर हो गए और उन नामों में से सिर्फ सम्राट चौधरी ही चर्चा में बने हुए हैं वह इस बात की तरफ इशारा करता है कि बीजेपी और जेडीयू के बीच बीजेपी खेमे से बिहार के मुख्यमंत्री के चयन का जो फार्मूला तय हुआ है ,वह न तो बीजेपी को मनमानी करने का खुलेआम छूट देने वाला है और ना भी जेडीयू को पूरी तरह से अलग करने वाला होगा। यानी अब बिहार का अगला मुख्यमंत्री ऐसा होगा जो जेडीयू और बीजेपी दोनों ही बैकग्राउंड का होगा।

इस फार्मूले के तहत वर्तमान समय में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे आगेसे चल रहे सम्राट चौधरी भी आते हैं जो 2014 में जेडीयू खेमे से मंत्री थे। और वर्तमान समय में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में बीजेपी खेमा से उपमुख्यमंत्री हैं। इस फार्मूले पर फिट होने वाली दूसरी उम्मीदवार हैं श्रेयसी सिंह जो बीजेपी खेमा से नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में आईटी और खेल मंत्री हैं। श्रेयसी सिंह अपने खुद के बल पर भले ही सिर्फ बीजेपी से जुड़ी हुई हो ,लेकिन उनके पिता दिग्विजय सिंह समता पार्टी के निर्माण काल में ही नीतीश कुमार से जुड़े हुए थे और बाद में जब जनता दल यूनाइटेड का गठन हुआ तब वे जेडीयू के भी संस्थापक सदस्यों में एक थे और जेडीयू की तरफ से सांसद और केंद्र में राज्य मंत्री भी रहे थे। इस लिहाज से श्रेयसी सिंह का भी संबंध बीजेपी और जेडीयू दोनों से जुड़ जाता है जो इस नए फार्मूले का तकाजा है।

बिहार के मुख्यमंत्री के नाम को लेकर भले ही सम्राट चौधरी आगे चल रहे हो, लेकिन जैसा की पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी अपनी पार्टी के किसी राज्य के मुख्यमंत्री की घोषणा चौंकाने वाले अंदाज से करते हैं, उसे देखते हुए सम्राट चौधरी के बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में बढ़ते हुए कदम जहां के तहां थम सकते हैं। यह बात सही है की सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनकर बीजेपी कोईरी कुर्मी खेमा को अपने पक्ष में कर सकती है। लेकिन एक तो कोईरी जिस समुदाय से सम्राट चौधरी आते हैं बिहार में उसकी जनसंख्या का प्रतिशत दो से तीन है। वहीं बीजेपी के पास इस वर्ग को प्रभावित करने के लिए उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता भी हैं।

बात श्रेयसी सिंह की बिहार के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर की जाए तो ये सवर्ण समुदाय से आती हैं, जिसकी जनसंख्या बिहार में 15% है। लेकिन इससे भी बड़ी बात जिसे लेकर बीजेपी बिहार की राजनीति के साथ-साथ केंद्र की राजनीति को साध सकतती हैं ,वह है इनका युवा ,महिला और खिलाड़ी होना। बिहार समेत विभिन्न राज्यों में और पूरे देश में महिला लगभग आधी आबादी मानी जाती है, अगर एक खिलाड़ी के रूप में इन्हें रोल मॉडल के तौर पर प्रस्तुत किया जाय जिनके प्रति युवाओं का खास आकर्षण होता है, तो वह लगभग 65% है। इस लिहाज से श्रेयसी सिंह सम्राट चौधरी की तुलना में बीजेपी के लिए कहीं ज्यादा राजनीतिक लाभ प्रदान करने वाले मुख्यमंत्री होगी।

फिर अभी केंद्र में जिस प्रकार से बीजेपी 16 अप्रैल को सदन में महिला आरक्षण बिल जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है संशोधन के लिए ला रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अधिनियम को पारित करवा कर आदि आबादी महिलाओं के वोट को अपने पक्ष में कर 2029 ई का आम चुनाव में जीत हासिलकार लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री बनने और इस दरमियान होने वाले उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के चुनाव में बीजेपी को जिताकर सरकार बनाने का ख्वाब देख रहे हैं। इस लिहाज से भी भी श्रेयसी सिंह के बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में एक बड़ी भूमिका होगी।

आज एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सम्मान को बढ़ाने में अपना हर संभव प्रयास करने की बात कह कर इस बात को बल दे दिया है कि बिहार में 15 अप्रैल को बीजेपी जिस नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने की बात कर रही है वह एक महिला होगी और यह चेहरा श्रेयसी सिंह हो सकती है।

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