Bihar News: बिहार में ज्ञान की विरासत को बचाने का मिशन तेज! लाखों पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण

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Bihar News: बिहार में सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने के लिए सरकार अब बड़े स्तर पर काम कर रही है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग बिहार के तहत आयोजित समीक्षा बैठक में “ज्ञान भारतम् मिशन” की प्रगति को लेकर अहम फैसले लिए गए। इस बैठक की अध्यक्षता प्रत्यय अमृत ने की, जिसमें सभी जिलों के डीएम के साथ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।

75 साल पुरानी धरोहर को मिलेगा नया जीवन, AI से होगा डिजिटलीकरण

“ज्ञान भारतम् मिशन” भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मकसद देश की प्राचीन पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। इस मिशन के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को शामिल किया गया है, जिन्हें कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़े या धातु पर लिखा गया है।

अब इन दुर्लभ ग्रंथों को AI आधारित तकनीक और क्लाउड सिस्टम के जरिए डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित किया जाएगा, जिससे उनका अनुवाद, संपादन और प्रकाशन आसान हो सकेगा।

बिहार बना पांडुलिपियों का खजाना! देश में चौथा स्थान

पांडुलिपियों के मामले में बिहार देश के टॉप राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य में कुल 4,71,802 पांडुलिपियां चिन्हित की गई हैं, जिससे बिहार देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। जिलों की बात करें तो मधुबनी सबसे आगे है, जहां 3.70 लाख से ज्यादा पांडुलिपियां मिली हैं। इसके बाद पटना, दरभंगा और नालंदा का स्थान आता है।

नालंदा से लेकर खुदाबख्श लाइब्रेरी तक, बने बड़े सेंटर

इस मिशन को सफल बनाने के लिए कई प्रमुख संस्थानों को क्लस्टर सेंटर बनाया गया है। नव नालंदा महाविहार, खुदाबख्श लाइब्रेरी और बोधगया मठ को प्रमुख केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है, जो पूरे राज्य में सर्वे और संरक्षण कार्य को गति दे रहे हैं।

हर जिले में बनेगी कमेटी, मिशन को बनाया जाएगा जन आंदोलन

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि हर जिले में “ज्ञान भारतम् मिशन समिति” बनाई जाए और नियमित समीक्षा हो। साथ ही विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के साथ मिलकर इस मिशन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

सरकार का लक्ष्य है कि इस अभियान को “Talk of the Cities & Villages” बनाया जाए, ताकि आम लोग भी अपनी धरोहर को बचाने में भागीदारी निभा सकें।

सोशल मीडिया से लेकर प्रदर्शनी तक, जागरूकता अभियान शुरू

लोगों को जोड़ने के लिए फोटो प्रदर्शनी, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के जरिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बेहतरीन काम करने वाले सर्वेयर और संग्रहकर्ताओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा, जिससे इस मिशन में प्रतिस्पर्धा और उत्साह दोनों बढ़े।

PM मोदी ने भी ‘मन की बात’ में किया जिक्र, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी अहमियत

इस मिशन की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में मन की बात में पांडुलिपि सर्वे का जिक्र किया है। आने वाले समय में केंद्र सरकार भी सभी राज्यों के साथ इस मिशन की उच्च स्तरीय समीक्षा करेगी।

बिहार का लक्ष्य: विरासत को ग्लोबल प्लेटफॉर्म तक पहुंचाना

बिहार सरकार इस अनमोल सांस्कृतिक धरोहर को न सिर्फ संरक्षित करना चाहती है, बल्कि उसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में भी काम कर रही है। यह मिशन आने वाले समय में भारत की ज्ञान परंपरा को नई पहचान देने वाला साबित हो सकता है।

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