भारत में LPG सिलेंडर की कमी की खबरों के बीच इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल बढ़ गया है। लोग खाना बनाने के लिए अलग-अलग तरह के स्टोव का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन क्या आपको प्लग-एंड-प्ले हाइड्रोजन कुकिंग स्टोव के बारे में पता है। एक कंपनी ने घरों और कमर्शियल किचन के लिए कॉम्पैक्ट, प्लग-एंड-प्ले हाइड्रोजन कुकिंग स्टोव पेश किया है। यह पानी और बिजली का इस्तेमाल करके खुद का ईंधन बनाता है। इसे भारत की तेल और प्राकृतिक गैस कंपनी Greenvize ने बनाया है। इस सिस्टम में एक प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) इलेक्ट्रोलाइजर होता है, जिसे सीधा स्टैंडर्ड कुकिंग यूनिट में लगाया जाता है। आइये, इसके बारे में जानते हैं।
भारत के स्टार्टअप Greenvize ने हाइड्रोजन पावर्ड कुकटॉप पेश किया है। इसमें प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) इलेक्ट्रोलाइजर के जरिए यूजर्स एक नॉब घुमाकर पानी से हाइड्रोजन बना सकते हैं और स्टोव का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें गैस को स्टोर करने या पाइपलाइन जैसे किसी तामझाम की जरूरत नहीं पड़ती है। यह अपने आप में एक आत्मनिर्भर कुकिंग सिस्टम है। बता दें कि इलेक्ट्रोलाइजर ऐसी तकनीकी या डिवाइस है, जो बिजली के जरिए पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग-अलग तोड़ती है।
इसकी खासियत है कि इसमें खाना पकाने के लिए हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर किया जाता है। साथ ही, सिस्टम से धुएं के बजाय सिर्फ पानी की भाप निकलती है। साथ ही, यह मशीन ऑक्सीजन भी छोड़ती है, जिससे आपके आस-पास की हवा शुद्ध और ताजा हो जाती है।
Greenvize के डायरेक्टर और को-फाउंडर संजीव चौधरी ने बताया कि स्टोव चालू होते ही शुरू हो जाता है। हाइड्रोजन बनाने के लिए सिस्टम को लगभग 100 मिलीलीटर डिस्टिल्ड या रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) पानी और लगभग एक किलोवाट घंटा (kWh) बिजली की जरूरत होती है। इन सब से लगभग लगातार छह घंटे तक खाना पकाया जा सकात है। बता दें कि इस यूनिट को छत पर लगे सोलर पैनल से भी जोड़ा जा सकता है।
चौधरी ने बताया कि इस सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें हाइड्रोजन बनाने वाली मशीन (इलेक्ट्रोलाइजर) सीधे चूल्हे से जुड़ी होती है। जैसे ही आप चूल्हा जलाते हैं, हाइड्रोजन उसी वक्त तुरंत बनती है। पहले से स्टोर नहीं होती है। इसका मतलब है कि तुरंत ईंधन बनता है और तुरंत इस्तेमाल होता है। इससे स्टोरेज का झंझट खत्म हो जाता है।
कंपनी का सॉल्यूशन बिजली को हाइड्रोजन फ्यूल में बदलकर कम बिजली का इस्तेमाल करता है।कंपनी का कहना है कि हालांकि इंडक्शन स्टोव और Greenvize हाइड्रोजन कुकिंग सिस्टम, दोनों ही बिजली का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनकी एफिशिएंसी, फ्लेसिबिलिटी और असल दुनिया में इस्तेमाल करने की क्षमता में काफी फर्क है।
कंपनी ने कहा कि उनका हाइड्रोजन कुकिंग स्टोव भारत के ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के हिसाब से बनाया गया है, जो एक टिकाऊ और ऊर्जा सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करता है।
सिंगल-बर्नर वाले हाइड्रोजन स्टोव की कीमत 1,05,000 रुपये (1,128 USD) है।
डबल-बर्नर वाले वर्जन की कीमत लगभग 1,50,000 रुपये (1,610 USD) है।
हालांकि, सिस्टम की कीमत थोड़ा ज्यादा है। आम जनता के लिए फिलहाल इसे खरीद पाना मुमकिन नहीं है।

