Bihar News: बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने अब तेज रफ्तार से काम शुरू कर दिया है। इसी दिशा में बिहार संग्रहालय में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्यभर में फैली प्राचीन पांडुलिपियों को सुरक्षित और डिजिटल रूप में संरक्षित करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
30 दिनों का अल्टीमेटम! हर हाल में पूरा होगा पांडुलिपि सर्वे

बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा यह काम किसी भी हाल में धीमा नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त आदेश देते हुए कहा कि पूरे राज्य में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य अगले 30 दिनों के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। इसे ‘मिशन मोड’ में चलाने पर जोर दिया गया, ताकि समयसीमा के अंदर लक्ष्य हासिल हो सके।
हर जिले को जिम्मेदारी, लोकल स्तर पर बढ़ेगा समन्वय
बैठक में जिला-वार प्रगति की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में क्लस्टर सेंटर और स्वतंत्र संस्थानों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर इस अभियान को गति दें। सरकार का फोकस है कि कोई भी महत्वपूर्ण पांडुलिपि छूट न जाए और हर धरोहर को सूचीबद्ध किया जा सके।
डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम, अब ऑनलाइन सुरक्षित होगी विरासत

‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत सिर्फ पांडुलिपियों को इकट्ठा करना ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित करना भी प्राथमिकता है। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए बिहार की बौद्धिक और सांस्कृतिक संपदा को संरक्षित रखा जा सकेगा और शोध के लिए भी यह सामग्री आसानी से उपलब्ध होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सख्त निगरानी
अभियान की प्रगति पर नजर बनाए रखने के लिए 9 अप्रैल को सभी संबंधित अधिकारियों के साथ एक विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने का निर्णय लिया गया है। इस बैठक में रणनीति को और मजबूत किया जाएगा और कार्य की गति की समीक्षा होगी।
विशेषज्ञों की मौजूदगी में बनी बड़ी रणनीति

इस अहम बैठक में कई बड़े विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हुए, जिनमें खुदाबख्श लाइब्रेरी से जुड़े विद्वान, नव नालंदा महाविहार के कुलपति और अन्य शिक्षाविद शामिल थे। सभी ने इस मिशन को बिहार की सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
बिहार की पहचान को नई ताकत देने की तैयारी
सरकार का मानना है कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बिहार की पहचान और गौरव को नई मजबूती देने का माध्यम है। अगर यह अभियान तय समय में पूरा होता है, तो राज्य की अनमोल धरोहर को न सिर्फ संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उसे पहचान मिल सकती है।

