पेनक्रियाज का कैंसर सबसे गंभीर प्रकार के कैंसरों में गिना जाता है, क्योंकि इसका पता अक्सर शुरुआती चरण में नहीं चल पाता है।पेनक्रियाज पेट के पीछे स्थित एक छोटा अंग है, जो भोजन पचाने के लिए एंजाइम बनाता है और इंसुलिन जैसे हार्मोन के जरिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है।जब इस अंग में कैंसर विकसित होता है, तो शुरुआत में यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के चुपचाप बढ़ता रहता है।यही कारण है कि अधिकतर मामलों का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है और इलाज कठिन हो जाता है।
पैनक्रियास जर्नल में पब्लिश और अमेरिकन कैंसर सोसाइटी व नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, इस कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती संकेत बहुत सामान्य होते हैं।कई लोगों को हल्का पेट दर्द, पीठ में दर्द या थोड़ी मात्रा में खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होने लगता है। ये लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, क्योंकि ये आम समस्याओं जैसे गैस या तनाव से भी जुड़े हो सकते हैं।
इस कैंसर की वजह से कुछ लोगों को हल्की मतली या पाचन में बदलाव भी महसूस हो सकता है। चूंकि ये लक्षण आते-जाते रहते हैं, इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते हैं।लेकिन अगर ये लगातार बने रहें, तो यह चेतावनी इस कैंसर का संकेत हो सकता है।इस कैंसर का एक महत्वपूर्ण लक्षण पीलिया है, जिसमें त्वचा और आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगता है।यह तब होता है, जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बढ़ जाता है।ट्यूमर पित्त नली को ब्लॉक कर देता है, जिससे यह समस्या होती है। इसके साथ गहरे रंग का यूरिन, हल्के रंग का मल और त्वचा में खुजली भी हो सकती है।
बिना कारण वजन कम होना भी इस कैंसर का एक बड़ा संकेत है।कई मरीजों में महीनों पहले से वजन गिरने लगता है, क्योंकि पेनक्रियाज पर्याप्त एंजाइम नहीं बना पाता और शरीर पोषक तत्वों को सही से अब्जॉर्व नहीं कर पाता है। इससे कमजोरी बढ़ती है और मल त्याग में बदलाव भी देखा जा सकता है। मल तैलीय, हल्के रंग का या फ्लश करने में कठिन हो सकता है। कुछ लोगों में अचानक डायबिटीज भी विकसित हो सकता है, जो इस बात का संकेत हो सकता है कि पेनक्रियाज प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा थकान, भूख कम लगना और शरीर में असामान्य बदलाव महसूस होना भी इस कैंसर का संकेत हो सकता है। ये लक्षण आम जरूर हैं, लेकिन अगर लगातार बने रहें या एक साथ दिखें, तो सावधान रहना जरूरी है। कुछ जोखिम कारक भी इस बीमारी की संभावना बढ़ाते हैं। धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है. इसके अलावा मोटापा, पेनक्रियाज में लंबे समय तक सूजन और परिवार में इस बीमारी का इतिहास भी इस कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं।

