पाक ने खेला आतंकी खेल तो भारत उससे भी बड़ा खेला कर उससे ले लेगा पीओके वापस

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इस समय भारत की खुफिया एजेंसी एनआईए, रॉ तथा आतंकवादी घटना पर नियंत्रण रखने वाली एटीएस जैसी एजेंसियां संयुक्त रूप से मिलकर बड़ा अभियान चला रही है। हाल ही में इसने दिल्ली महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से पाकिस्तान ,सीरिया समर्थित आई एस, आई एस आई एस से जुड़े ,कुछ आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। इसे लेकर आप यह सवाल कर सकते हैं कि इन एजेंसियों का तो काम ही यही है, फिर इसमें बड़ा क्या है? सरसरी तौर पर इसमें भले ही कुछ बड़ा नहीं दिखता हो , लेकिन इसके अंदर काफी काफी गहरा राज छिपा हुआ है। भारत सरकार और इसकी खुफिया एजेंसी फिलहाल इस राज को उजागर नहीं कर रही है क्योंकि इसके जरिए इसे एक बड़ा खेल खेलना है।

ये गिरफ्तार आतंकी पाकिस्तान से भेजे गए आतंकवादी नहीं हैं। ये अपने ही देश के रसूखदार लोग हैं जिनका समाज में बड़ा रुतवा है। इसमें डॉक्टर ,आईटी प्रोफेशनल जैसे प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं, जो अपने प्रभाव का उपयोग कर भारत के ही एक खास वर्ग के लोगों को भारत के विरुद्ध आतंकवादी घटना को अंजाम देने के लिए खड़ा कर रहे हैं। इन गिरफ्तार आतंकियों से इनके कारनामे को लेकर जो बातें उजागर हुई है, वह काफी खतरनाक है। यह धार्मिक स्थलों पर बम विस्फोट कर भारी तबाही मचाने की मंशा रखते हैं ,ये रेल गाड़ियों को दुर्घटनाग्रस्त कर लोगों की जान लेने पर उतारू हैं, ताकि भारत के दो समुदायों के बीच मारकाट मच जाए और फिर भारत की सरकार और सेना अपने आंतरिक मामलों में उलझ जाए, और फिर इसकी आड़ में पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध एक विशेष समुदाय से द्वेष करने की बात करते हुए एक बड़ी कार्रवाई करने का मौका मिल जाए।

भारत सरकार पाकिस्तान के इस मंसूबे को भली भांति समझती हैं ,इसलिए वह इस बार पाकिस्तान के विरुद्ध एक ऐसा बड़ा खेल खेलने की तैयारी कर रही है, जिसके बाद पाकिस्तान इस लायक बचे ही नहीं कि वह भारत के विरुद्ध फिर आगे कभी कोई खेल खेल सके।

भारत के नरेंद्र मोदी की सरकार इस बड़े खेल से जुड़ी हुई कई महत्वपूर्ण तरीके को तो बिल्कुल गोपनीय रख रही है, लेकिन कुछ तरीके को उजागर कर पाकिस्तान को यह संदेश भी दे रही है कि वह आतंकवादियों के भरोसे आग का जो खेल खेलना चाह रही है, उससे परहेज कर ले, नहीं तो आग के इस खेल में उसका सब कुछ जलकर राख हो जाएगा।

इसके तहत भारत ने अपनी सैन्य क्षमता काफी बढ़ा ली है। हाल के दिनों में इसके नौसेना में INS अरनाला जो पानी के भीतर दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने वाला युद्धपोत है। और
INS तारागिरी को 3 अप्रैल 2026 को कमीशन किया है , जो सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है। इसके अलावा हल्के एयर कॉम्बैट हेलीकॉप्टर को भी शामिल किया गया है जो भारतीय युद्ध पोत से दुश्मन देश पर बड़ी कार्रवाई करने में सक्षम है।

इन गिरफ्तार आतंकियों से भारत सरकार को पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्धकी जा रही तैयारी की जानजारी तो मिली ही है, कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां भी हाथ लगी है। इन जानकारी में भारतीय सेना के कुछ गद्दारों द्वारा सेना से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण जानकारी इन आतंकियों तक पहुंचाने के अलावा भारत के कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा इन आतंकवादियों को अपने वक्तव्यों से सुरक्षा कवच प्रदान करना शामिल है।

भारत की नरेंद्र मोदी सरकार और इसकी एजेंसियां सेना के इन गद्दारों को गिरफ्तार कर उन पर कोर्ट मार्शल कर बड़ी दंडात्मक करवाई कर रही है ताकि इसके द्वारा भविष्य के गद्दारों को भी जल्दी ही ऐसे मामले से पीछे हट जाने के लिए खौफ पैदा हो सके।

इसके अलावा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा इन आतंकवादियों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से देश की सरकार को बदनाम करने और सेना के मनोबल को तोड़ने के लिए दिए जा रहे वक्तव्यों से निपटने का भी प्रयास कर रही है। फिलहाल ये नेता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में या संसद में बोले जाने के अधिकार के तहत अपने आप को किसी भी बड़ी कार्रवाई होने से बचा ले रहे हैं। लेकिन अब यह सब ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है, क्योंकि नरेंद्र मोदी की सरकार ने इनसे निपटने का भी पूरी तरह से मन बना लिया है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी तक को लेकर प्रधानमंत्री यह कहने लगे हैं कि ये पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं।साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन खुफिया एजेंसियों द्वारा आतंकवादियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर राहुल गांधी समेत उन नेताओं के विरुद्ध तथ्यात्मक प्रमाण जुटाने में लग गए हैं, ताकि ऐसे नेताओं पर जरूरत पड़ी तो बड़ी कार्रवाई की जा सके।

फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पाकिस्तान के द्वारा आतंकवाद का खेल की शुरुआत करते ही उससे भी बड़ा खेल करने की अपनी तैयारी में जूटे हुए हैं। ऐसे में हाल में आतंकवादियों के द्वारा लालकिला के पास आत्मघाती हमले में जब 13 लोगों की जान चली गई और दो दर्जन से भी ज्यादा लोग घायल हो गए, तब विपक्षी नेताओं को देश की नरेंद्र मोदी की सरकार के विरुद्ध हमला बोलने का एक अवसर मिल गया। दरअसल इस मामले में नरेंद्र मोदी की सरकार की सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों ने कुछ संदिग्धों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया था और उनसे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में लग गए थे। इस मामले में हालांकि गृह मंत्री अमित शाह तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गए थे, लेकिन इस घटना को वे एक सामान्य आपराधिक घटना बता रहे थे। उन्हें इस घटना को आतंकवादी घटना बताने में 24 घंटे से भी ज्यादा का समय लग गया था। लेकिन सब यह सब नरेंद्र मोदी की सरकार का पाकिस्तान के विरुद्ध खेले जाने वाले बड़े खेल की तैयारी का एक हिस्सा था। लेकिन इससे राहुल गांधी और अन्य कई विपक्षी राजनीतिक दल के नेता को यह कहकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला करने का अवसर मिल गया कि जब ऑपरेशन सिंदूर जारी है और प्रधानमंत्री ने कहा है कि पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाली कोई आतंकवादी घटना को देश के विरुद्ध हमला माना जाएगा और पाकिस्तान के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही की जाएगी तो प्रधानमंत्री इस मामले में अब तक कुछ कर क्यों नहीं रहे हैं।

विपक्षी राजनीतिक दल के इस आरोप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्कुल चुप्पी साथ रखी थी, क्योंकि उन्हें पाकिस्तान के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा खेल खेलना है। वह इससे जुड़ी तमाम बातों को लेकर खुफिया एजेंसियों के प्रमुख और सैन्य प्रमुखों के साथ मिलकर रणनीति बनाने में जुटे रहे।

भारत द्वारा पाकिस्तान पाकिस्तान के आतंकी खेल के जवाब में उससे भी बड़ा खेल खेले जाने की बात सुनकर आपके मन में भी या जिज्ञासा होती होगी कि भारत कौन सा बड़ा खेल खेलने की तैयारी कर रहा है। हालांकि यह सारी बातें सीधे तौर पर उजागर नहीं की जाती है लिहाजा भारत के नरेंद्र मोदी सरकार ने भी इस बात का खुलासा सीधे-सीधे नहीं किया है। लेकिन भारत सरकार ने इसे पूरी तरह से गोपनीय बनाकर भी नहीं रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के कई बड़े मंत्रियों के पिछले वक्तव्यों पर नजर डालें तो भारत के द्वारा पाकिस्तान के विरुद्ध खेले जाने वाले इस बड़े खेल की रूपरेखा आपको साफ दिख जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सबसे पहले एक चुनावी भाषण के दौरान पाकिस्तान द्वारा अधिकृत कश्मीर के क्षेत्र को भारत में वापस ले लेने की बात कही थी। इसके बाद फिर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने विभिन्न सवालों के जवाब के दौरान लोकसभा में पाक अधिकृत कश्मीर को वापस भारत में लाने की बात भी दोहराई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के इन बड़े नेताओं के द्वारा कहीं बातें भारत के द्वारा पाकिस्तान के उकसावे पर उसके विरुद्ध खेले जाने वाले बड़े खेल का तो खुलासा होता नजर आ रहा है। लेकिन एक बड़ा सवाल अभी भी बचा हुआ है कि आखिर भारत पाकिस्तान के विरुद्ध यह बड़ा खेल कब खेलेगा! हाल में प्रचलित विपक्षी राजनीतिक दलों के द्वारा पूछे जाने वाले और जवाब दिए जाने वाले कुछ सवालों के जवाब को हल्के अंदाज में लिया जाए तो कहा जा सकता है कि भारत पाकिस्तान के विरुद्ध या बड़ा खेल तब खेलेगा जबकि डोनाल्ड ट्रंप भारत को ऐसा करने के लिए कहेंगे। हालांकि अभी तक किसी भी विपक्षी नेता ने इस तरह के तंज नहीं कसे हैं ।और न हीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के द्वारा इस बड़े खेल जिसके द्वारा भारत पाकिस्तान से पाक अधिकृत कश्मीर को वापस ले सकता है ,खेलने के समय को लेकर कोई समय सीमा नहीं बताई गई है। लेकिन इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले इशारों में नहीं बल्कि सीधे तौर पर ऐसी बातें बता चुके हैं। उनके द्वारा सेना के सम्मान में कई बार यहां तक कह दिया गया है कि उनके शासनकाल में सेना को खुद लड़ाई से जुड़े अपने निर्णय लेने का अधिकार दे दिया गया है।

पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवाने ने प्रधानमंत्री की इसी भावना का जिक्र अपनी एक किताब में किया है। आपको याद होगा की किस प्रकार से राहुल गांधी ने पूर्व सी अध्यक्ष जनरल म नरवानी की किताब की इसी बातों का जिक्र कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में आकर जवाब देने की बात कह कर कई दिनों तक संसद की कार्यवाही को लगातार स्थगित करने के लिए बाध्य कर दिया था। यह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाली सरकार का पाकिस्तान के विरुद्ध खेले जाने वाले बड़े खेल की रणनीति का ही एक हिस्सा था। वरना जब यह किताब स्वीकृति के लिए पीएमओ में लाई गई होगी, तभी वह इसके छापने पर सीधे सीधे रोक लगा सकती थी, जिससे इसका कोई भी अंश किसी रूप में बाहर नहीं आ पाता। लेकिन इन्हें तो इसके जरिए पाकिस्तान को भी यह सबक देना था कि अगर पाकिस्तान ने भारत में आतंकवाद का छोटा सा खेल खेलने का भी प्रयास किया तो भारतीय सेना इस बार खुद ही पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलाकर पाकिस्तान के शेष हिस्से को तबाह कर देगी।

अब भारतीय सेना अपनी सीधी करवाई के लिए प्रधानमंत्री या सरकार के स्तर से निर्देश आने का भी इंतजार नहीं करेगी। इस बार 1971 और 72 की तरह भारतीय सेना शिमला समझौता जैसी स्थिति जिसमें पाकिस्तान पर जीत हासिल कर भी भारत ने पीओके पाकिस्तान के पास ही रहने दिया था,वैसी स्थिति आने ही नहीं देगी। हालांकि इससे ऐसा नहीं समझना चाहिए कि भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना की तरह देश के चुने हुए सरकार की अनदेखी नहीं करती है, बल्कि सरकार के नियंत्रण में रहते हुए भी भारतीय सेना और सरकार के बीच बड़ा अच्छा तालमेल है।

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