आखिर अडानी ग्रुप के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वेदांता ग्रुप,अडानी को डील मिलने पर मचा है बवाल

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गौतम अडानी के ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ होने के वजह से अडानी ग्रुप देश और विदेश में बड़े-बड़े ठेके लेने में सफल हो जाती है। अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और पीएम मोदी की संबंध को लेकर राहुल गांधी सड़कों पर तो बोलते ही हैं ,वह इसे लेकर संसद में चर्चा करने तक की भी मांग कर चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद गौतम अडानी की कंपनी अडानी ग्रुप का जलवा बरकरार है। लेकिन ऐसे ही एक मामले को लेकर अब वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में घसीट लिया है।

यह मामला जयप्रकाश एसोसिएट ग्रुप की खरीदारी के लिए बोली लगाने से संबंधित है। इसके बारे में कहा जाता है कि इस बोली में जीत हासिल करने के बावजूद अडानी ग्रुप ने इसे हथियाने के लिए इस मामले में पेंच फंसा दिया है और वेदांता ग्रुप की जीती बोली को हथियाने में छूट गया है।

जयप्रकाश एसोसिएट्स को जून, 2024 में दिवालिया प्रक्रिया में शामिल किया गया था क्योंकि कंपनी पर करीब 57185 करोड़ रुपये का लोन बकाया था। जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए कई बड़ी कंपनियां दौड़ में थीं। वेदांता के चैयरमेन ने हाल ही में ट्वीट करके बताया कि उन्हें वेदांता को सितंबर में ही जेपी ग्रुप की संपत्ति के लिए बोली जीतने की लिखित पुष्टि मिली थी। हालांकि बाद में इस फैसले को पलट दिया गया।

अब इसको लेकर वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें जेपी ग्रुप के एसेट्स के लिए अडानी ग्रुप की ओर से पेश किए रिजॉल्यूशन प्लान पर रोक लगाने की मांग की गई है।

वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिवालिया हो चुके जेपी ग्रुप की संपत्तियों के लिए अडानी ग्रुप द्वारा प्रस्तुत समाधान योजना पर रोक लगाने की मांग की है । एक हफ्ते पहले ही, 17 मार्च को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने अडानी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी।

जेपी ग्रुप की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएटेड लिमिटेड (JAL) भारी कर्ज में डूब गई थी। इसके समाधान के लिए इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्टैसी कोड के तहत प्रक्रिया शुरू हुई जिसमें अलग-अलग खरीदारों ने बोली लगाई । इन खरीदारों में प्रमुख से अनिल अग्रवाल की वेदांता ग्रुप, गौतम अडानी की अदानी ग्रुप और डालमिया ग्रुप।

एक दिन पहले वेदांता समूह के प्रमुख अनिल अग्रवाल ने एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि वेदांता ग्रुप को जेपी ग्रुप की संपत्ति के लिए बोली जीतने की लिखित पुष्टि मिली थी लेकिन बाद में इसे पलट दिया गया।
उन्होंने एक्स पर लिखा की हाल ही में आईबीसी के तहत सीओसी की प्रक्रिया के द्वारा इस संपत्ति की नीलामी की गई। कई मजबूत दावेदारों ने इसे खरीदने के लिए अपनी बोली लगाई। अचानक जयप्रकाश गौड़ जी की भावनाएं और उनकी इच्छा मेरे मन में ताजा हो गई। एक-एक कर सभी बोली दाताओं ने अपने नाम वापस ले लिए। आखिरकार हमें सबसे बड़ी बोली लगने वाला घोषित कर दिया गया।
यह एक पूरी तरह से पारदर्शी प्रक्रिया थी और हमें सूचित किया गया कि हम जीत गए हैं। लेकिन जिंदगी हमेशा इतनी सीधी नहीं होती। कुछ दिनों बाद या फैसला बदल दिया गया। मैं इसकी प्रक्रिया की पेचीदगियों में जाना नहीं चाहता ,लेकिन मैं इसकी एक बात आप लोगों को कहता हूं।

इस संपत्ति से हमारा कोई मोह या लगाव नहीं है। अगर यह हमें मिलती है यह ईश्वर की कृपा होगी और अगर यह मेरे हाथ से निकल जाती है तो भी यह उनकी ही इच्छा होगी। लेकिन एक बात पर हमारा पक्का भरोसा है कि जब धर्म के मार्ग पर चलकर कोई वादा किया जाता है तो कभी उसे वापस नहीं लिया जाना चाहिए।

जयप्रकाश एसोसिएट लिमिटेड भारत के सबसे बड़े दिवालिया मामलों में से एक है। कंपनी पर 57 150 करोड रुपए का भारी भरकम कर्ज है। इसी कारण कंपनी 2024 में दीवाला प्रक्रिया में चली गई।

इस कंपनी के पास कई तरह की बड़ी संपत्तियां हैं। इनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रींस जैसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट, आने वाले जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी, इसके अलावा होटल और कई इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

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