हार्ट की सेहत की बात होती है तो आमतौर पर लोग एलडीएल, एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड जैसे कोलेस्ट्रॉल के आंकड़ों पर ध्यान देते हैं। ज्यादातर हेल्थ चेकअप में भी इन्हीं पैरामीटर्स की जांच की जाती है।लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि कई बार एक अहम फैक्टर नजरअंदाज रह जाता है, जिसे लाइपोप्रोटीन (a) या Lp(a) कहा जाता है।यह एक ऐसा कोलेस्ट्रॉल कण है जो सामान्य लिपिड प्रोफाइल में अक्सर शामिल नहीं होता, लेकिन दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
Lp(a) दरअसल एलडीएल कोलेस्ट्रॉल जैसा ही एक कण होता है, लेकिन इसमें एक अतिरिक्त प्रोटीन जुड़ा होता है।यही प्रोटीन इसे शरीर में अलग तरह से व्यवहार करने के लिए जिम्मेदार बनाता है। अधिक मात्रा में मौजूद होने पर यह आर्टरीज में प्लाक बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है, ब्लड वेस्ल्स में सूजन बढ़ा सकता है और खून के थक्के बनने की संभावना भी बढ़ा देता है। यही कारण है कि यह दिल का दौरा और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है।
एक्सपर्ट के अनुसार भारत में समय से पहले दिल की बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई रिपोर्टों में बताया गया है कि देश में होने वाली कुल मौतों का बड़ा हिस्सा हार्ट रोगों से जुड़ा है। चिंता की बात यह है कि कई मरीजों में हार्ट अटैक पश्चिमी देशों की तुलना में 10 से 15 साल पहले हो रहा है। जेनेटिक प्रवृत्ति, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अनएक्टिव लाइफस्टाइल और छिपे हुए लिपिड मार्कर जैसे Lp(a) इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सामान्य कोलेस्ट्रॉल टेस्ट में Lp(a) की जांच नहीं की जाती। इसलिए कई लोगों की रिपोर्ट सामान्य दिखाई देती है, लेकिन उनके शरीर में यह जोखिम मौजूद रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक के मामले रहे हों, उन्हें यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
