लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाया गया विपक्ष का प्रस्ताव चर्चा के बाद ध्वनिमत से खारिज हो गया। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किये गए संकल्प पर 12 घंटे से अधिक समय की चर्चा हुई। सरकार की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद, पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इसे मतदान के लिए सदन के समक्ष रखा। सदन ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, ध्वनिमत से संकल्प को अस्वीकृत कर दिया।
संकल्प पर चर्चा और मतदान के दौरान बिरला सदन में उपस्थित नहीं थे। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है। उन्होंने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है। गृह मंत्री के एक शब्द को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया और उनसे माफी की मांग की।
इससे पहले विपक्ष के संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा के दौरानअमित शाह ने कहा कि इस सदन के स्थापित इतिहास के अनुसार, इसकी कार्यवाही आपसी विश्वास के आधार पर संचालित होती है। अध्यक्ष एक निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जो सत्ताधारी दल और विपक्ष, दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्यक्ष सत्रों का संचालन किस प्रकार करें, इस संबंध में मार्गदर्शन के लिए इसी लोकसभा द्वारा विशिष्ट नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई बाजार नहीं है। सदस्यों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे इसके नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप ही अपनी बात रखें और चर्चा में भाग लें। इस दौरान शाह ने जब राहुल गांधी की सदन में अहम मौके पर गैरमौजूदगी का सवाल उठाया तो विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी सदस्यों ने ‘अमित शाह माफी मांगो’ के नारे भी लगाए।
