बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला ह. लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमा⁵र अब दिल्ली की ओर चल पड़े हैं तो वहीं उनके बेटे निशांत t आखिरकार सक्रिय राजनीति का हिस्सा हो गए हैं. परिवारवाद से दूर रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने जनता दल यूनाइटेड (JDUkkkkm
इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट निशांत कुमार को पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में जद(यू) में शामिल किया गया।
JDU में शामिल होने के बाद निशांत ने कहा कि मेरे पिता ने राज्यसभा सदस्य बनने का फैसला लिया, यह उनका व्यक्तिगत निर्णय था।हम सभी इसका सम्मान करते हैं।हम उनके मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे. मैं संगठन को मजबूत करने के लिए काम करूंगा।
जद(यू) कार्यालय में आगमन पर निशांत का जोरदार स्वागत हुआ। पार्टी कार्यकर्ता कार्यालय के बाहर जमा हुए और पार्टी का झंडा लहराते हुए ढोल बजाते दिखे। इस बीच, अटकलें हैं कि निशांत को नई सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।नीतीश कुमार के एक करीबी सहयोगी ने शनिवार को दावा किया कि एक सर्वसम्मत निर्णय लिया गया था कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई सरकार में निशांत को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।हरनौत से जेडीयू के विधायक हरि नारायण सिंह ने दावा किया कि निशांत को अगले महीने राज्य विधान परिषद का सदस्य चुना जाएगा।
बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के दिग्गज नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के 8 मार्च 2026 को सक्रिय राजनीति में आने की खबर ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। निशांत कुमार ने पटना में जेडीयू की सदस्यता ली है।
नीतीश कुमार अब तक खुद को परिवारवाद से दूर रखने वाले नेता के रूप में पेश करते आए हैं और आरजेडी (RJD) व अन्य दलों पर परिवारवाद को लेकर हमला बोलते रहे हैं।लेकिन अब वे भी इसी रास्ते पर चल पड़े हैं।हालांकि जेडीयू के नेता और समर्थक इसे परिवारवाद नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की मांग के रूप में देखने की बात कह रहे हैं। यह तर्क दिया जा रहा है कि निशांत कुमार एक शिक्षित (बीटेक डिग्री) युवा हैं, जिनका राजनीति में प्रवेश युवा नेतृत्व की के जरूरत को पूरा करने के लिए है।
नीतीश कुमार के बेटे निशांत के जेडीयू में शामिल होने को लेकर नेता विपक्ष तेजस्वी यादव इसे नीतीश कुमार की “एंटी-परिवारवाद” छवि के __ विपरीत और एक और वंशवादी एंट्री के रूप में देख रहे हैं, खासकर तब जब हाल ही में नीतीश कैबिनेट में कई ‘फैमिली फर्स्ट’ नेता शामिल हुए हैं।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री के कई संभावित असर हो सकते हैं
जेडीयू में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।निशांत कुमार की एंट्री से जेडीयू में युवा नेतृत्व की कमी को पूरा करने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का प्रयास माना जा रहा है।
समर्थकों को उम्मीद है कि निशांत के आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी। जेडीयू ने “युवा सोच.. मजबूत संकल्प” का नया नारा भी दिया है।
सत्ता का हस्तांतरण ।नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच, यह माना जा रहा है कि निशांत पार्टी में बड़ी भूमिका निभाएंगे, संभवतः आगे चलकर उपमुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी।
निशांत का जेडीयू में प्रवेश करता गया है।इसे नीतीश कुमार के ‘लव-कुश’ सामाजिक समीकरण को बनाए रखने के लिए एक प्रयास माना जा रहा है।
यह घटना नीतीश कुमार की उस पुरानी छवि को सीधे तौर पर चुनौती देती है जिसमें वे परिवार के सदस्यों को राजनीति से दूर रखते थे।
यह उनके ‘सुशासन बाबू’ के नैरेटिव में बदलाव ला सकता है, जहाँ अब उन्हें भी वंशवादी राजनीति के घेरे में घसीटा जा सकता है।
