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क्या सच में नहीं होता सोराइसिस का कोई इलाज, जानें कितनी खतरनाक है यह बीमारी

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सोरायसिस एक ऐसी स्किन की बीमारी है जिसमें त्वचा पर खुजलीदार, परतदार और लाल या गहरे रंग के चकत्ते उभर आते हैं।यह अक्सर घुटनों, कोहनियों, कमर के निचले हिस्से और सिर की त्वचा पर दिखाई देता है।यह इंफेक्शन नहीं है, यानी एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं आता क्या फैलता, लेकिन यह एक क्रॉनिक बीमारी है जो बार-बार उभर सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि यह कितना खतरनाक है.

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट मायो क्लिनिक के अनुसार, यह एक इम्यून-मीडिएटेड बीमारी है, यानी इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम असामान्य तरीके से सक्रिय हो जाती है और त्वचा की सेल्स जरूरत से ज्यादा तेजी से बनने लगती हैं।सामान्य रूप से त्वचा की सेल्स धीरे-धीरे बनती और झड़ती हैं, लेकिन सोरायसिस में यह प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे त्वचा पर मोटी, पपड़ीदार परतें जम जाती हैं, इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है, हालांकि सही उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

सोरायसिस में त्वचा पर अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।किसी में रूसी जैसे छोटे धब्बे दिखते हैं तो किसी में बड़े हिस्से पर लाल या बैंगनी रंग के चकत्ते बन जाते हैं जिन पर सफेद या सिल्वर रंग की परत होती है।त्वचा सूखी और फटी हुई हो सकती है, जिससे कभी-कभी खून भी आ सकता है।खुजली, जलन या दर्द भी महसूस हो सकता है
यह बीमारी अक्सर चक्रों में चलती है, कुछ हफ्तों या महीनों तक लक्षण बढ़ते हैं, फिर कुछ समय के लिए कम हो जाते हैं।

इसके कई प्रकार होते हैं। प्लाक सोरायसिस सबसे सामान्य रूप है, जिसमें मोटी और उभरी हुई परतें बनती हैं।नेल सोरायसिस में नाखूनों पर गड्ढे, रंग में बदलाव या नाखून का ढीला पड़ना देखा जा सकता है।गुट्टेट सोरायसिस आमतौर पर बच्चों और युवाओं में होता है और अक्सर गले के इंफेक्शन के बाद दिखाई देता है।इनवर्स सोरायसिस शरीर की सिलवटों जैसे कमर या ब्रेस्ट के नीचे में चिकने और लाल धब्बों के रूप में दिखता है।पस्टुलर और एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस रेयर लेकिन गंभीर प्रकार हैं, जिनमें पस भरे फफोले या पूरे शरीर पर लाल, छिलती हुई त्वचा हो सकती है।

अगर त्वचा पर लगातार ऐसे लक्षण दिखें, जो बढ़ते जाएं, दर्द दें या इलाज के बावजूद ठीक न हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।समय पर पहचान और सही इलाज से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और नॉर्मल लाइफ जिया जा सकता है।

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