सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर को पूरा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया, इसे ‘असाधारण स्थिति’ बताया।14 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में आपत्तियों के लिए समय सीमा 14 फरवरी से एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हुई हिंसा के आरोपों पर जवाब देने को भी कहा था।
हाल ही में, टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राज्य में मतदाता सूची की सफाई के खिलाफ भारत के मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से याचिका दायर की थी।
पश्चिम बंगाल में हो रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की जाए। पश्चिम बंगाल में जजों की कमी के चलते ये फैसला लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को जारी करने के लिए एक बार फिर अपनी स्पेशल पावर का इस्तेमाल किया, जिसे आर्टिकल 142 कहते हैं।आइए जानते हैं कि आर्टिकल 142 क्या है और किन मामलों में सु्प्रीम कोर्ट इसका इस्तेमाल करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश जारी किया है कि 28 फरवरी तक तय किए गए दावों के साथ अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाए, जिसके बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होगी।पड़ोसी राज्यों के जजों की मदद लेने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है, तो ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से संबंधित दावों और आपत्तियों को तय करने के लिए लगाया जा सकता है। कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट जजों के अलावा कम से कम 3 साल का अनुभव रखने वाले सीनियर और जूनियर डिवीजन के सिविल जजों को भी इस काम में शामिल करने की इजाजत दी है।
सुप्रीम कोर्ट को भारतीय संविधान में एक खास ताकत दी गई है, जिसमें जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च अदालत पूर्ण न्याय कर सके। इस स्पेशल पावर का इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट खुद से कोई भी फैसला सुना सकता है।जिन मामलों में सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि न्याय पूरा नहीं हुआ है या फिर कुछ गलत हो रहा है तो उनमें आर्टिकल 142 का इस्तेमाल कर आदेश जारी किया जाता है।
पिछली सुनवाई में एसआईआर के लिए अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच मतभेदों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को न्यायिक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। इसे लेकर सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने बताया कि एसआईआर की समय सीमा के हिसाब से पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं।
बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन निरीक्षण (SIR) की अंतिम लिस्ट 28 फरवरी को जारी होनी है। मतदाता सूची में वोटर्स की आपत्तियों और दावों की जांच के लिए राज्य सरकार को क्लास 2 के अधिकारी चुनाव आयोग को दिए जाने के लिए कहा गया था, जिसे लेकर दोनों पक्षों में मतभेद देखने को मिले और कोर्ट ने यह काम न्यायिक अधिकारियों से करवाने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचौल की बेंच ने कहा कि 50 लाख दावों की जांच होनी है।अगर 250 डिस्ट्रिक्ट जज और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज इसके लिए नियुक्त किए गए हैं और अगर हर अधिकारी एक दिन में 250 केस का निपटारा करता है, तब भी इस काम को पूरा करने में 80 दिन लगेंगे।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि स्थिति को देखते हुए हम पिछले आदेश में यह निर्देश भी जोड़ रहे हैं-
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तीन साल से अधिक अनुभव वाले सिविल जजों का भी इस्तेमाल करें।
अगर उन्हें लगता है कि अभी भी न्यायिक अधिकारियों की कमी है तो वह पड़ोसी राज्यों- झारखंड और ओडिशा के चीफ जस्टिस से भी न्यायिक अधिकारी उपलब्ध करवाने का अनुरोध करें।
इन अधिकारियों के आने-जाने और ठहरने का खर्चा चुनाव आयोग उठाएगा।
28 फरवरी को फाइनल लिस्ट के प्रकाशन की तारीख है। चुनाव आयोग उसके बाद भी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी हो सकती है।
सप्लीमेंट्री लिस्ट में जगह पाने वाले लोगों को भी फाइनल लिस्ट में शामिल माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें एसआईआर की प्रक्रिया की वैधता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। बंगाल सरकार ने दूसरे राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने का विरोध किया था।वहीं, चुनाव आयोग ने दावा किया कि राज्य सरकार ने अधिकारी नहीं दिए, जिस वजह से दूसरे राज्यों से अधिकारी बुलाए गए।
9 फरवरी की सुनवाई में कोर्ट ने बंगाल सरकार को क्लास 2 के अधिकारी उपलब्ध करवाने का भी निर्देश दिया था, लेकिन 20 फरवरी को चुनाव आयोग ने बताया कि अब तक उन्हें अधिकारी नहीं दिए गए। वहीं, बंगाल सरकार का कहना है कि चुनाव आयोग ने अब एक और नए तरीके के अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं।इन्हें स्पेशल रोल ऑफिसर कहा जा रहा है, यह स्पेशल ऑफिसर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) से भी ऊपर हैं। दोनों पक्षों के बीच इस विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर का काम न्यायिक अधिकारियों से करवाने का निर्देश दिया था।
