किडनी की बीमारी को अक्सर “साइलेंट” कंडीशन कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके साफ लक्षण नजर नहीं आते।लेकिन जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है, शरीर की त्वचा कई संकेत देने लगती है। अगर इन्हें समय रहते समझ लिया जाए तो गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।
सबसे आम लक्षणों में से एक है त्वचा का बहुत ज्यादा रूखा हो जाना।त्वचा खुरदुरी, पपड़ीदार और तनी हुई महसूस हो सकती है।कई बार इसमें दरारें पड़ने लगती हैं और यह मछली की चमड़ी जैसी दिखने लगती है।
लगातार खुजली भी किडनी रोग का बड़ा संकेत हो सकती है।यह खुजली शरीर के किसी एक हिस्से तक सीमित रह सकती है या पूरे शरीर में फैल सकती है।गंभीर मामलों में यह रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगती है।
जब खुजली लंबे समय तक बनी रहती है तो त्वचा पर खरोंच के निशान दिखने लगते हैं। कुछ जगहों पर त्वचा मोटी हो सकती है या सख्त गांठें बन सकती हैं। इन हिस्सों में इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
किडनी सही तरीके से काम न करे तो खून में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं।इसका असर त्वचा के रंग पर भी दिख सकता है, जो पीली, धूसर या असामान्य रूप से फीकी नजर आ सकती है। कुछ लोगों में त्वचा मोटी और पीली परत वाली भी हो जाती है।
नाखूनों में बदलाव भी एक अहम संकेत है।नाखूनों का ऊपरी हिस्सा सफेद और निचला हिस्सा भूरा या लाल दिख सकता है।कभी-कभी नाखूनों पर सफेद रेखाएं भी उभर आती हैं, जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।
शरीर में सूजन यानी एडेमा भी किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है। पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन आने लगती है और त्वचा तनी हुई या चमकदार दिख सकती है।
खून में टॉक्सिन बढ़ने से त्वचा पर दाने या रैशेज भी हो सकते हैं। ये छोटे-छोटे उभरे हुए दाने होते हैं, जिनमें तेज खुजली होती है और ठीक होने के बाद भी दोबारा उभर सकते हैं।
कुछ गंभीर मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के फफोले भी पड़ सकते हैं। ये हाथ, पैर या चेहरे पर दिखाई दे सकते हैं और सूखने के बाद निशान छोड़ जाते हैं।
पेट या कमर के आसपास कोई नई गांठ या सूजन दिखे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या या कैंसर का संकेत भी हो सकता है।
रेयर मामलों में त्वचा असामान्य रूप से सख्त और कसी हुई महसूस हो सकती है। इसे नेफ्रोजेनिक सिस्टमिक फाइब्रोसिस कहा जाता है, जो खास परिस्थितियों में विकसित हो सकता है।
किडनी की बीमारी खून में कैल्शियम और फॉस्फेट का संतुलन बिगाड़ सकती है।इससे त्वचा के नीचे कैल्शियम जमा होने लगता है, खासकर जोड़ों के आसपास, जो कभी-कभी दर्दनाक भी हो सकता है।
