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एंड्रयू के एप्स्टीन फाइल मामले में जेल से ,अमेरिका भारत पर डालेगा दवाब

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ब्रिटेन में किंग चाल्र्स के भाई एंड्रयू को गिरफ्तार कर लिया गया है।उन्हें सार्वजनिक पद पर रहते हुए गलत बर्ताव के शक में पकड़ा गया है।एपस्टीन मामले में पीडि़ता रही वर्जीनिया गिफ्रे ने आरोप लगाया था कि 2001 में जब वह 17 साल की थी, तब प्रिंस एंड्रयू ने उनका यौन शोषण किया था। हालांकि एंड्रयू ने ग्रिफे के सभी आरोपों को खारिज किया था।गिफ्रे की अप्रैल 2025 में मौत हो गई थी। इसकी वजह आत्महत्या बताई गई थी।एंड्रयू आधुनिक इतिहास में गिरफ्तार होने वाले पहले शाही सदस्य बन गए हैं। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने पिछले साल अक्टूबर में अपने छोटे भाई एंड्रयू से प्रिंस का खिताब और सभी शाही उपाधियां वापस ले ली थीं। उन्हें विंडसर स्थित उनके आलीशान घर रॉयल लॉज को भी खाली करने का आदेश दिया गया।65 साल के एंड्रयू दिवंगत क्वीन एलिजाबेथ के दूसरे बेटे हैं।

प्रिंस एंड्रयू पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने वाली वर्जिनिया गिफ्रे की अप्रैल 2025 में मौत हो गई थी।रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने आत्महत्या की थी।वर्जिनिया उम्र 41 वर्ष ने साल 2011 में अमेरिका के हाई प्रोफाइल वेश्यावृत्ति नेटवर्क का खुलासा कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था।वर्जिनिया ने अपने साथ हुए यौन शोषण और तस्करी का खुलासा किया था। उसने कहा था कि जब वह सिर्फ 15 साल की थी। तभी एपस्टीन के नेटवर्क में फंस गई थीं।उसे कई प्रभावशाली और हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया।इसी इंटरव्यू में वर्जिनिया ने ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू के साथ अपनी मुलाकातों का भी जिक्र किया था।

आरोप है कि एंड्रयू ने कई देशों के साथ होने वाली ट्रेड रणनीतियों की ब्रीफिंग फाइल्स एपस्टीन को लीक कर दी थीं।इनमें ब्रिटेन की आने वाली डील और निवेश योजनाओं की जानकारी थी। ऐसे दस्तावेज किसी देश के लिए टॉप सीक्रेट्स में गिने जाते हैं और एंड्रयू ने किसी लालच की वजह से बेखौफ इसे लीक कर दिया था।

जब एंड्रयू आधिकारिक दौरों पर विदेशों में जाते थे, तो उन्हें भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की जानकारी दी जाती थी। आरोप है कि उन्होंने इन सूचनाओं का इस्तेमाल एपस्टीन को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया।इसमें तेल, गैस और रक्षा ट्रेड से जुड़ी गोपनीय जानकारियां शामिल हो सकती हैं।

एंड्रयू ने अपने देश की वो सीक्रेट रणनीति भी लीक कर दी है।जिसमें दुनिया भर के पावरफुल लीडर्स और बिजनेस टायकून की प्रोफाइल्स थीं।ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने दुनिया भर की शख्सियतों की खासियत, कमजोरियां, उनकी पसंद-नापसंद के बारे में डीटेल फाइल तैयार की थी। आशंका है कि एपस्टीन ने इनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया हो।

हाल ही में पुलिस ने ऐसे कई ईमेल और लेटर बरामद किए हैं जिन्हें ‘ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट’ के तहत गोपनीय रखा जाना चाहिए था।इन ईमेल्स में एंड्रयू कथित तौर पर एपस्टीन से सलाह मांग रहे थे कि किसी खास सौदे में किसे फायदा पहुंचाया जाना चाहिए।

अमेरिकी वित्तीय और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों (Epstein Files) में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम और उनसे जुड़ी कथित ईमेल एक्सचेंज सामने आने के बाद मोदी सरकार के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर है और हरदीप पुरी के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

हरदीप पुरी ने स्वीकार किया है कि वे पूर्व में जेफरी एपस्टीन से 3-4 बार मिल चुके हैं, जिसे वे पेशेवर (professional) बैठक बताते हैं। विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं कि एक दोषी यौन अपराधी के साथ मंत्री के संबंध कैसे हो सकते हैं, जो सरकार की नैतिकता पर सवाल उठाता है।
कांग्रेस का आरोप है कि हरदीप पुरी ने 2014-17 के दौरान एपस्टीन के साथ 62 ईमेल साझा किए और डिजिटल इंडिया जैसे सरकारी विषयों पर चर्चा की। सवाल उठ रहा है कि क्या नीतिगत फैसले (policy matters) किसी विदेशी निजी व्यक्ति के साथ साझा किए जा रहे थे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से समझौता हो सकता है।
विपक्षी दलों ने हरदीप पुरी के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है और संसद में इस मुद्दे को उठा रहे हैं। यह सरकार के लिए एक बड़ा संकट हो सकता है, विशेषकर जब सरकार विकास के एजेंडे पर टिकी हो।

विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं कि क्या उस समय भारत की विदेश नीति प्रधानमंत्री के बजाय अमेरिका में बैठे एक अपराधी द्वारा संचालित की जा रही थी।

ब्रिटेन की शाही परिवार से जुड़े एंड्रयू के पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के बाद अब विश्व बिरादरी के कुछ देश खासकर अमेरिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हरदीप पुरी को अपने मंत्रिमंडल से निकालने के लिए नैतिक दबाव बना सकते हैं और इसके लिए कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों को अपना मोहरा बना सकते हैं। डोनाल्ड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने आप को फिर से शांति का मसीहा बनने में जुट गए हैं।एक बार फिर से उनके द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के दौरान शांति बनाने की बात दोहराई है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ हुई ट्रेड डील जिसका अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है,उसमें बड़ा बदलाव कर उसे अमेरिकी हित के अनुकूल कर सकते हैं। इसके अलावा अमेरिकी अमेरिका की अध्यक्षता वाले पीस बोर्ड में भारत को शामिल करने के लिए इस एप्स्टीन फाइल का मामला उठाकर दबाव बना सकते है जिसमें अभी तक भारत शामिल नहीं हुआ है।

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